मुख्य बिंदु
मंडी में 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत पंचायत प्रतिनिधियों के लिए एक जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी मंडी डॉ. दिनेश ठाकुर ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।
कार्यशाला का विवरण
यह कार्यशाला मंडी जिले में आयोजित की गई, जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों को पीसीपीएनडीटी अधिनियम की विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ. दिनेश ठाकुर ने बालिकाओं के संरक्षण, शिक्षा और सशक्तीकरण पर जोर दिया। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
पुलिस और बाल विकास विभाग का योगदान
कार्यशाला में पुलिस थाना मंडी के प्रभारी ने पीसीपीएनडीटी अधिनियम के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई और नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी। वहीं, बाल विकास परियोजना अधिकारी जितेंद्र सैनी ने विभागीय योजनाओं से अवगत करवाया।
प्रभाव और आगे की राह
इस कार्यशाला का उद्देश्य पंचायत स्तर पर जागरूकता बढ़ाना और कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई को खत्म करना है। डॉ. दिनेश ने कहा कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए क्या कानून है?
पीसीपीएनडीटी अधिनियम (प्री-कंसेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक्स एक्ट) लिंग निर्धारण और कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाता है। इसके उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई होती है।
'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान का उद्देश्य क्या है?
इस अभियान का उद्देश्य बालिकाओं के अस्तित्व, सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तीकरण को सुनिश्चित करना तथा लिंगानुपात में सुधार लाना है।
कार्यशाला में किन विषयों पर चर्चा हुई?
कार्यशाला में पीसीपीएनडीटी अधिनियम, बालिकाओं के संरक्षण, शिक्षा और सशक्तीकरण, नशे के दुष्प्रभाव, तथा विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई।