परिचय
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क (UGCF) 2022 के चौथे वर्ष के क्रेडिट ढांचे में बदलाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि यूनिवर्सिटी ने एकेडमिक काउंसिल और एग्जीक्यूटिव काउंसिल जैसी वैधानिक संस्थाओं की मंजूरी के बिना यह बदलाव रजिस्ट्रार के नोटिफिकेशन से लागू कर दिया।
मुख्य बदलाव
यूनिवर्सिटी ने शुक्रवार को एक नोटिफिकेशन जारी कर चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) के चौथे वर्ष के क्रेडिट ढांचे में संशोधन किया। इसके तहत डिसर्टेशन (शोध प्रबंध) के क्रेडिट 6 से बढ़ाकर 10 कर दिए गए हैं, जबकि डिसिप्लिन स्पेसिफिक कोर (DSC) पेपर की संख्या घटा दी गई है।
नोटिफिकेशन के अनुसार, "UGCF 2022 के तहत सभी स्नातक कार्यक्रमों के सेमेस्टर 7 और 8 में डिसिप्लिन स्पेसिफिक कोर (DSC) के तहत सूचीबद्ध कोर्स हटा दिए जाएंगे और उन्हें उसी डिसिप्लिन के डिसिप्लिन स्पेसिफिक इलेक्टिव (DSE) पूल में शामिल किया जाएगा।"
2026-27 शैक्षणिक सत्र से छात्रों को सेमेस्टर 7 और 8 में एकेडमिक ट्रैक के अलावा केवल तीन-तीन कोर्स चुनने होंगे। ये विकल्प होंगे: तीन DSE, या दो DSE और एक जेनेरिक इलेक्टिव (GE), या एक DSE और दो GE।
नोटिफिकेशन में कहा गया, "DSC को आवंटित चार क्रेडिट को एकेडमिक ट्रैक (डिसर्टेशन, एकेडमिक प्रोजेक्ट, एंटरप्रेन्योरशिप) में जोड़ दिया जाएगा, जिससे यह पहले के 6 क्रेडिट के बजाय 10 क्रेडिट हो जाएगा।" इसके परिणामस्वरूप, एकेडमिक ट्रैक अब कुल 20 क्रेडिट का होगा — सेमेस्टर 7 और 8 में 10-10 क्रेडिट।
शिक्षकों की आपत्ति
एकेडमिक काउंसिल की निर्वाचित सदस्य और विधि संकाय की सहायक प्रोफेसर अनुमेहा मिश्रा ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी ने एकेडमिक काउंसिल और एग्जीक्यूटिव काउंसिल को दरकिनार कर रजिस्ट्रार के नोटिफिकेशन से बदलाव लागू किए। उन्होंने कहा, "एक रजिस्ट्रार के नोटिफिकेशन के जरिए UGCF में भारी बदलाव करके और एकेडमिक काउंसिल व एग्जीक्यूटिव काउंसिल को पूरी तरह दरकिनार करके, यूनिवर्सिटी ने उचित प्रक्रिया की पूरी तरह अनदेखी की है। यह फैसला चौथे वर्ष के छात्रों पर अवास्तविक बोझ डालेगा।"
एग्जीक्यूटिव काउंसिल के निर्वाचित सदस्य मिथुराज धूसिया ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे "टॉप-डाउन अप्रोच" बताया। उन्होंने कहा, "यह टॉप-डाउन अप्रोच, जहां मुट्ठी भर लोग वैधानिक निकायों में चर्चा के बिना शैक्षणिक ढांचे में मनमाने बदलाव करते हैं, बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।" धूसिया ने कोर पेपर को इलेक्टिव से बदलने पर भी आपत्ति जताई, चेतावनी दी कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और विभागों व शिक्षकों के लिए स्थिर शैक्षणिक कार्यभार कम हो सकता है।
दिल्ली टीचर्स फ्रंट (DTF) की सचिव अभा देव हबीब ने सवाल उठाया कि यूनिवर्सिटी ने एकेडमिक काउंसिल या एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक किए बिना ये बदलाव क्यों लागू किए, और क्या इस पैमाने के नीतिगत फैसले के लिए आपातकालीन शक्तियों का उपयोग उचित था।
हबीब ने एक बयान में आरोप लगाया कि चौथे वर्ष में एकमात्र अनिवार्य डिसिप्लिन-स्पेसिफिक कोर पेपर को हटाने से छात्रों की शैक्षणिक नींव कमजोर होगी, जबकि डिसर्टेशन के क्रेडिट 6 से 10 करने से उनका कार्यभार बिना उचित शैक्षणिक सहायता के बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा नियम के तहत शिक्षकों को नियमित शिक्षण कर्तव्यों के अलावा 10 छात्रों की डिसर्टेशन गाइड करनी पड़ती है, जो पहले से ही अव्यावहारिक है, और संशोधित ढांचा छात्रों और शिक्षकों दोनों पर तनाव बढ़ा सकता है।
प्रभाव और आगे की राह
इस बदलाव से चौथे वर्ष के छात्रों को अधिक डिसर्टेशन कार्य करना होगा, जबकि कोर पेपर की कमी से विषय की गहरी समझ प्रभावित हो सकती है। शिक्षकों का कहना है कि यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया है और इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
DU के UGCF में चौथे वर्ष के क्रेडिट ढांचे में क्या बदलाव किया गया है?
डीयू ने चौथे वर्ष में डिसर्टेशन के क्रेडिट 6 से बढ़ाकर 10 कर दिए हैं और डिसिप्लिन स्पेसिफिक कोर (DSC) पेपर हटाकर उन्हें डिसिप्लिन स्पेसिफिक इलेक्टिव (DSE) पूल में डाल दिया है। अब सेमेस्टर 7 और 8 में छात्रों को तीन-तीन कोर्स चुनने होंगे।
शिक्षकों ने इस बदलाव पर क्या आपत्ति जताई है?
शिक्षकों का कहना है कि यह बदलाव एकेडमिक काउंसिल और एग्जीक्यूटिव काउंसिल की मंजूरी के बिना रजिस्ट्रार के नोटिफिकेशन से लागू किया गया, जो नियमों का उल्लंघन है। इससे चौथे वर्ष के छात्रों पर अनावश्यक बोझ बढ़ेगा और शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
डिसर्टेशन क्रेडिट बढ़ने से क्या प्रभाव पड़ेगा?
डिसर्टेशन के क्रेडिट 6 से 10 होने से छात्रों पर कार्यभार बढ़ेगा, जबकि शिक्षकों को पहले से ही 10 छात्रों की डिसर्टेशन गाइड करनी पड़ती है। इससे तनाव बढ़ने की आशंका है।