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कपु आरक्षण आंदोलन के चेहरे मुद्रगडा पद्मनाभ का निधन

कपु आरक्षण आंदोलन के चेहरे का निधन मुद्रगडा पद्मनाभ, जो आंध्र प्रदेश में कपु समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल करने की मांग के प्रमुख नेता थे, का मंगलवार को हैदराबाद के एक…

कपु आरक्षण आंदोलन के चेहरे का निधन

मुद्रगडा पद्मनाभ, जो आंध्र प्रदेश में कपु समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल करने की मांग के प्रमुख नेता थे, का मंगलवार को हैदराबाद के एक अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे।

कौन थे मुद्रगडा पद्मनाभ?

मुद्रगडा का संबंध काकीनाडा जिले के किरलमपुडी से था। वे 2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद कपु समुदाय के आरक्षण आंदोलन के चेहरे बनकर उभरे। कपु समुदाय राज्य की आबादी का लगभग 15-18% है और पारंपरिक रूप से किसी एक पार्टी को वोट नहीं देता, जिससे यह एक प्रभावशाली चुनावी ब्लॉक माना जाता है।

राजनीतिक सफर

मुद्रगडा का राजनीतिक करियर चार दशकों से अधिक समय तक फैला रहा। उन्होंने 1978 में जनता पार्टी के टिकट पर प्रतिपाडु विधानसभा सीट से चुनाव जीता। इसके बाद 1983 और 1985 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के उम्मीदवार के रूप में और 1989 में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। वे चार बार विधायक रहे। उन्होंने एन.टी. रामा राव के पहले मंत्रिमंडल में आबकारी मंत्री के रूप में भी कार्य किया, लेकिन अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले इस्तीफा दे दिया। बाद में वे 1999 से 2004 तक काकीनाडा से TDP सांसद रहे।

कपु आरक्षण आंदोलन और तुनि हिंसा

विभाजन के बाद मुद्रगडा ने कपु समुदाय के लिए BC दर्जे की मांग तेज कर दी। तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और बाद में वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने इस मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।

31 जनवरी 2016 को तुनि रेलवे स्टेशन पर 'कपु गर्जना' रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने रत्नाचल एक्सप्रेस पर पथराव किया और कई डिब्बों में आग लगा दी। इस हिंसा में रेलवे संपत्ति और पुलिस स्टेशन को भी निशाना बनाया गया। इस घटना ने मुद्रगडा के राजनीतिक करियर को बदल दिया और वे धीरे-धीरे सार्वजनिक जीवन से दूर होते गए।

पवन कल्याण से टकराव और नाम परिवर्तन

बाद में अभिनेता-नेता पवन कल्याण जन सेना पार्टी के माध्यम से कपु समुदाय के प्रमुख नेता के रूप में उभरे। 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले मुद्रगडा ने घोषणा की कि यदि पवन कल्याण जीतते हैं तो वे अपना नाम बदलकर मुद्रगडा पद्मनाभ रेड्डी कर लेंगे। कल्याण की जीत के बाद उन्होंने सरकारी अधिसूचना के माध्यम से अपना नाम बदल लिया।

पारिवारिक विवाद

चुनावों से पहले मुद्रगडा और उनकी बेटी क्रांति के बीच सार्वजनिक विवाद हुआ था, जिन्होंने पवन कल्याण को समुदाय का नेता बताया था। मुद्रगडा ने गुस्से में कहा था कि उनकी बेटी उनकी मृत्यु के बाद भी उनसे मिलने न आए। बुधवार को क्रांति जब किरलमपुडी में पिता को श्रद्धांजलि देने पहुंचीं तो उन्हें 'वापस जाओ' के नारे सुनने को मिले।

निष्कर्ष

मुद्रगडा पद्मनाभ का निधन कपु आरक्षण आंदोलन के एक युग का अंत है। वे एक ऐसे नेता थे जिन्होंने चार दशकों तक राजनीति में सक्रिय रहते हुए कपु समुदाय के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उनकी विरासत आंध्र प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक याद की जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कपु आरक्षण आंदोलन क्या है?

कपु समुदाय आंध्र प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का दर्जा पाने के लिए लंबे समय से आंदोलन कर रहा है। मुद्रगडा पद्मनाभ इस आंदोलन के प्रमुख चेहरे थे।

मुद्रगडा पद्मनाभ ने अपना नाम क्यों बदला?

उन्होंने 2024 में घोषणा की थी कि यदि पवन कल्याण चुनाव जीतते हैं तो वे अपने नाम में 'रेड्डी' जोड़ देंगे। कल्याण की जीत के बाद उन्होंने सरकारी अधिसूचना के माध्यम से अपना नाम बदल लिया।

तुनि हिंसा क्या थी?

31 जनवरी 2016 को तुनि रेलवे स्टेशन पर कपु गर्जना रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने रत्नाचल एक्सप्रेस को निशाना बनाया और कई डिब्बों में आग लगा दी। इस घटना ने पद्मनाभ के राजनीतिक करियर को बदल दिया।

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