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लद्दाख प्रशासन के सात जिलों में हिल काउंसिल बनाने के फैसले का विरोध

मुख्य तथ्य लद्दाख प्रशासन ने केंद्र शासित प्रदेश के सभी सात जिलों में स्वायत्त हिल काउंसिल (AHDC) बनाने का निर्णय लिया है। इस फैसले का नागरिक समाज संगठनों, विशेषकर एपेक्स बॉडी लेह (ABL) और कारगिल…

मुख्य तथ्य

लद्दाख प्रशासन ने केंद्र शासित प्रदेश के सभी सात जिलों में स्वायत्त हिल काउंसिल (AHDC) बनाने का निर्णय लिया है। इस फैसले का नागरिक समाज संगठनों, विशेषकर एपेक्स बॉडी लेह (ABL) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने कड़ा विरोध किया है। दोनों संगठनों का आरोप है कि यह कदम अनुच्छेद 371 के तहत प्रस्तावित प्रतिनिधि सरकार की शक्तियों को कमजोर करने की साजिश है।

फैसले का विवरण

मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने सोमवार को घोषणा की कि पांच नए जिलों—ड्रास, शम, नुब्रा, चांगथांग और जांस्कर—में हिल काउंसिल का गठन किया जाएगा। फिलहाल ऐसी परिषदें केवल लेह और कारगिल में मौजूद हैं। कुंद्रा ने कहा कि यह निर्णय लंबे समय से चली आ रही मांगों के जवाब में लिया गया है और इससे लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और जमीनी स्तर पर शासन मजबूत होगा।

विरोध के कारण

ABL के सह-अध्यक्ष छेरिंग दोरजे लकरुक ने कहा, 'यह अनुच्छेद 371 के तहत बनने वाली प्रतिनिधि सरकार की शक्तियों को कमजोर करने की योजना है। अगर सारी शक्तियां हिल काउंसिलों को दे दी गईं, तो प्रतिनिधि सरकार क्या करेगी? लद्दाख की आबादी इतनी बड़ी नहीं है कि इतने अधिक विकेंद्रीकरण की जरूरत हो।' KDA के सह-अध्यक्ष सज्जाद कारगिली ने कहा, 'यह फैसला एकतरफा लिया गया है। न तो KDA और न ही ABL से सलाह ली गई। मौजूदा हिल काउंसिल पहले से ही दांतहीन हैं, ऐसे में सात नई परिषदें प्रशासन कैसे सुधारेंगी? यह अधिकतम सरकार और न्यूनतम शासन की योजना है।'

पृष्ठभूमि और वार्ता

यह फैसला ऐसे समय आया है जब केंद्र और लद्दाख के नागरिक समूहों के बीच संवैधानिक सुरक्षा उपायों को लेकर बातचीत चल रही है। सूत्रों के अनुसार, 22 मई को गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक में ABL और KDA ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी। बैठक के कार्यवृत्त में शुरू में यह प्रस्ताव शामिल था, लेकिन विरोध के बाद इसे हटा दिया गया। अब प्रशासन ने बिना सहमति के इसकी घोषणा कर दी।

प्रभाव और आगे की राह

ABL और KDA संयुक्त रूप से राज्य का दर्जा या अनुच्छेद 371 के तहत विधायी ढांचे, भूमि और नौकरियों की सुरक्षा, और बेहतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं। पिछले साल उन्होंने गृह मंत्रालय को एक मसौदा ढांचा सौंपा था। नए हिल काउंसिल के फैसले ने वार्ता में एक नया विवाद पैदा कर दिया है। पांच नए जिलों के निर्माण के समय भी KDA ने आरोप लगाया था कि इससे जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ेगा और बौद्ध बहुल जिले बनेंगे। अब हिल काउंसिल का मुद्दा भी वार्ता में अड़चन बन सकता है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

  • लद्दाख प्रशासन ने सातों जिलों में स्वायत्त हिल काउंसिल बनाने का फैसला किया है।
  • ABL और KDA का आरोप है कि इससे अनुच्छेद 371 के तहत प्रस्तावित सरकार कमजोर होगी।
  • दोनों संगठनों ने बिना सलाह के फैसला लेने पर नाराजगी जताई है।
  • यह फैसला केंद्र और लद्दाख के बीच चल रही वार्ता को प्रभावित कर सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लद्दाख प्रशासन ने कितने नए हिल काउंसिल बनाने की घोषणा की?

लद्दाख प्रशासन ने पांच नए जिलों ड्रास, शम, नुब्रा, चांगथांग और जांस्कर में स्वायत्त हिल काउंसिल बनाने की घोषणा की, जिससे कुल सात जिलों में हिल काउंसिल हो जाएंगी।

ABL और KDA ने इस फैसले का विरोध क्यों किया?

ABL और KDA का कहना है कि यह फैसला अनुच्छेद 371 के तहत प्रस्तावित प्रतिनिधि सरकार की शक्तियों को कमजोर करने की साजिश है। उनका आरोप है कि बिना उनकी सहमति के यह फैसला लिया गया।

क्या इस फैसले से लद्दाख के राजनीतिक भविष्य पर असर पड़ेगा?

हां, इस फैसले से केंद्र और लद्दाख के नागरिक समूहों के बीच चल रही वार्ता में नया विवाद पैदा हो गया है। ABL और KDA इसे अधिकतम सरकार और न्यूनतम शासन की योजना बता रहे हैं।

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