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सतलुज विवाद के बीच सीएम भगवंत मान की चुप्पी, पार्टी संभाल रही मोर्चा

मुख्य बिंदु पंजाब में फिल्म ‘सतलुज’ को OTT प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद उठे राजनीतिक बवाल के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान पिछले 10 दिनों से राज्य से बाहर हैं और इस मुद्दे पर चुप्पी…

मुख्य बिंदु

पंजाब में फिल्म 'सतलुज' को OTT प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद उठे राजनीतिक बवाल के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान पिछले 10 दिनों से राज्य से बाहर हैं और इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। उनकी अनुपस्थिति में आम आदमी पार्टी (AAP) ने विपक्ष का मुकाबला करने की जिम्मेदारी संभाली है।

विवाद की पृष्ठभूमि

फिल्म 'सतलुज' मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खलरा के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने पंजाब में आतंकवाद के दौरान पुलिस द्वारा किए गए अत्याचारों का पर्दाफाश किया था। यह फिल्म 3 जुलाई को OTT पर रिलीज हुई थी, लेकिन दो दिन बाद ही इसे हटा लिया गया। इसके बाद से कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

मुख्यमंत्री की चुप्पी और पार्टी की रणनीति

भगवंत मान 2 जुलाई को एक निजी वेलनेस सेंटर में भर्ती होने के लिए राज्य से बाहर गए थे। तब से उन्होंने न तो इस विवाद पर कोई टिप्पणी की है और न ही अकाली दल जैसे विपक्षी दलों के हमलों का जवाब दिया है। इस दौरान उन्होंने केवल एक वीडियो संदेश जारी कर लोगों से मतदाता सूची के विशेष संशोधन अभियान में भाग लेने और 'माँवाँ धियाँ सत्कार योजना' में पंजीकरण कराने की अपील की।

AAP सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने इस विवाद के संभावित राजनीतिक प्रभाव का आकलन किया है। एक वर्ग का मानना है कि इससे खडूर साहिब सांसद अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाले अकाली दल (वारिस पंजाब दे) को लाभ हो सकता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं। वहीं, दूसरे वर्ग का मानना है कि इस फिल्म से उस संगठन को कोई खास राजनीतिक फायदा नहीं होगा।

एक वरिष्ठ AAP पदाधिकारी ने कहा, "सतलुज विवाद पर आंतरिक चर्चा हुई है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। एक राय यह भी है कि किसी मुद्दे पर बात करने से वह और बड़ा हो जाता है।" एक अन्य नेता ने कहा, "कभी-कभी किसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने से वह और उभरता है। सीएम की प्रतिक्रिया से इसे बड़ा क्यों बनाया जाए?"

पार्टी और सरकार का रुख

मुख्यमंत्री की जगह पंजाब AAP अध्यक्ष अमन अरोड़ा और मुख्यमंत्री के OSD बलतेज पन्नू ने विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। अरोड़ा ने कहा कि राज्य फिल्म की निजी स्क्रीनिंग का विरोध नहीं करेगा और इसके प्रदर्शन पर फैसला केंद्र सरकार का है। वहीं, पन्नू ने जसवंत सिंह खलरा हत्याकांड के दोषियों की समयपूर्व रिहाई पर सवालों का जवाब देते हुए कहा कि मान सरकार ने इस संबंध में कोई फाइल साइन नहीं की है।

विपक्ष का हमला

शिरोमणि अकाली दल ने इस विवाद का फायदा उठाते हुए गांवों में फिल्म की स्क्रीनिंग की योजना बनाई है। SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि वे खुद गांवों में फिल्म दिखाएंगे। वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा, "जिन लोगों ने फिल्म बनवाई, उन्होंने इसे प्रतिबंधित किया, फिर OTT पर रिलीज किया और अब फिर से प्रतिबंधित कर दिया।"

सरकार का कल्याणकारी एजेंडा

इस विवाद के बीच AAP सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किए हुए है। 'माँवाँ धियाँ सत्कार योजना' के तहत पंजीकरण 1 जुलाई को लॉन्च के समय 36 लाख से बढ़कर 10 दिनों में 64 लाख से अधिक हो गया। सरकार इसे अपनी प्रमुख उपलब्धि बता रही है।

निष्कर्ष

भगवंत मान की चुप्पी और पार्टी द्वारा मोर्चा संभालना एक सोची-समझी रणनीति प्रतीत होती है, जिससे सरकार भावनात्मक बहस से दूर रह सके और अपने विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सके। हालांकि, विपक्ष इस मुद्दे को 2027 के विधानसभा चुनावों तक जिंदा रखने की कोशिश करेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • सतलुज फिल्म किस पर आधारित है? यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खलरा के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने पंजाब में आतंकवाद के दौरान पुलिस अत्याचारों का खुलासा किया था।
  • भगवंत मान ने इस विवाद पर चुप्पी क्यों रखी? मान 10 दिनों से निजी वेलनेस सेंटर में हैं और पार्टी का मानना है कि इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने से इसे और बढ़ावा मिलेगा।
  • विपक्ष ने इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया है? शिरोमणि अकाली दल फिल्म के गांव-गांव प्रदर्शन की योजना बना रहा है, जबकि कांग्रेस ने फिल्म के रिलीज और बैन के समय पर सवाल उठाए हैं।
  • क्या इस विवाद का अमृतपाल सिंह के संगठन को लाभ हो सकता है? AAP के अंदर आशंका है कि इससे अकाली दल (वारिस पंजाब दे) को राजनीतिक फायदा मिल सकता है, लेकिन कुछ नेताओं का मानना है कि इसका कोई खास असर नहीं होगा।
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