मुख्य तथ्य
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में अजीत पवार के निधन के बाद नेतृत्व को लेकर विवाद गहरा गया है। एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने को कानूनी चुनौती दी है, वहीं कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने पार्टी में सुधार की आवश्यकता स्वीकार की है।
विवरण
NCP के राष्ट्रीय सचिव और झारखंड इकाई के प्रमुख सच्चिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल और चुनाव नोडल अधिकारी बृजमोहन श्रीवास्तव को कानूनी नोटिस जारी किया है। इसमें सुनेत्रा पवार के चुनाव को 'अवैध, अस्तित्वहीन और शून्य' घोषित करने की मांग की गई है।
यह नोटिस 9 जुलाई को जारी किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि 26 फरवरी को झारखंड में हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में पार्टी संविधान का उल्लंघन कर सुनेत्रा पवार को अध्यक्ष चुना गया। सिंह के अनुसार, अजीत पवार के निधन के बाद 17 फरवरी की बैठक में प्रफुल्ल पटेल को अंतरिम अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन अगले ही दिन बिना संवैधानिक प्रक्रिया अपनाए नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
नोटिस में कहा गया है कि राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाने और अध्यक्ष चुनाव शुरू करने का अधिकार केवल कार्यकारी अध्यक्ष को था, महासचिव को नहीं। साथ ही, स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण नियुक्त करने, कार्यक्रम प्रकाशित करने, नामांकन आमंत्रित करने और मतदान प्रक्रिया जैसे अनिवार्य कदमों को दरकिनार किया गया।
प्रभाव और प्रतिक्रिया
सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में प्रफुल्ल पटेल ने कहा, 'अजीत पवार के निधन से पैदा हुई खालीपन को भरना मुश्किल है। पार्टी को सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है।' हालांकि उन्होंने कानूनी नोटिस का जिक्र नहीं किया, लेकिन उनकी टिप्पणी ने पार्टी में असहजता बढ़ा दी।
नोटिस में पार्टी नेतृत्व को 15 दिनों का समय देते हुए चुनाव आयोग में दाखिल दस्तावेज वापस लेने, सुनेत्रा पवार के चुनाव और पदाधिकारियों की सूची को रद्द करने, स्वतंत्र केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण गठित करने और संविधान के अनुसार नए चुनाव कराने की मांग की गई है। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो सिंह अदालत और चुनाव आयोग का रुख करेंगे।
पार्टी में असंतोष
NCP सूत्रों के अनुसार, अप्रैल में राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद पार्थ पवार का प्रभाव बढ़ गया है। वे अपनी मां सुनेत्रा की ओर से पार्टी में फैसले ले रहे हैं, जिससे कई विधायकों और पदाधिकारियों में नाराजगी है। कुछ नेताओं को पार्थ पवार की जनता से मिलने-जुलने में अनिच्छा भी खल रही है।
इसके अलावा, बीजेपी से वित्त मंत्रालय वापस न मिलने से भी निराशा है। सुनेत्रा और पार्थ ने नई दिल्ली में गृह मंत्री से मुलाकात की थी, जहां इस मुद्दे पर चर्चा हुई।
विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान पार्टी ने विधायक दल की एक भी बैठक नहीं बुलाई, न ही महत्वपूर्ण मुद्दों पर एकजुट चेहरा पेश किया। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'विधायकों की समस्याएं सिर्फ निर्वाचन क्षेत्र या फंड तक सीमित नहीं हैं। पहले अजीत दादा किसी भी विभाग के अधिकारी को हमारे काम के लिए बुला लेते थे, अब ऐसा नहीं होता।'
FAQ
सुनेत्रा पवार के चुनाव को किसने चुनौती दी है?
NCP के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने कानूनी नोटिस जारी कर सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने को चुनौती दी है।
प्रफुल्ल पटेल ने क्या कहा?
प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि अजीत पवार के निधन से पैदा हुई खालीपन को भरना मुश्किल है और पार्टी को सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है।
पार्टी में क्या अन्य समस्याएं हैं?
कई विधायकों ने शिकायत की है कि अजीत पवार की तरह अब कोई उनके काम नहीं कराता। साथ ही, पार्थ पवार के बढ़ते प्रभाव से नाराजगी है।