मुख्य तथ्य
हिमाचल प्रदेश के पंचायतीराज विभाग ने 14वें वित्तायोग की शेष राशि को समयबद्ध तरीके से विकास कार्यों में खर्च करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने सभी खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) और संबंधित पंचायतों को आदेश दिया है कि 16 जुलाई 2026 तक बची हुई राशि का उपयोग कर रिपोर्ट विभाग को भेजी जाए।
विस्तृत जानकारी
विभागीय सूत्रों के अनुसार, राज्य की 30 से अधिक पंचायतों के खातों में अभी भी लगभग एक करोड़ रुपये की राशि खर्च नहीं हुई है। कुछ दिन पहले तक यह राशि लगभग छह करोड़ रुपये थी, जिसमें से पांच करोड़ रुपये पहले ही विकास कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं। विभाग ने पहले संबंधित पंचायतों और बीडीओ को नोटिस जारी किए थे, जिसके बाद भुगतान में तेजी आई।
प्रभाव और आगे की कार्रवाई
केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत 14वें वित्तायोग की राशि का निर्धारित अवधि में उपयोग अनिवार्य है। यदि समय सीमा तक धनराशि खर्च नहीं होती है, तो पंचायतों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है। पंचायतीराज विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी बीडीओ अपने-अपने विकास खंड की पंचायतों की नियमित निगरानी करें और 16 जुलाई तक शेष राशि का उपयोग विकास कार्यों पर सुनिश्चित करें।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- 14वें वित्तायोग की राशि का उपयोग ग्रामीण विकास कार्यों के लिए किया जाना है।
- पंचायतों को समय पर धनराशि खर्च करने के लिए प्रशासनिक सहायता दी जा रही है।
- विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि कोई भी राशि बिना उपयोग के न रह जाए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
14वें वित्तायोग की शेष राशि कितनी है?
हिमाचल प्रदेश की 30 से अधिक पंचायतों में लगभग एक करोड़ रुपये शेष हैं।
यह राशि कब तक खर्च करनी है?
पंचायतीराज विभाग ने 16 जुलाई 2026 तक शेष राशि खर्च करने का आदेश दिया है।
यदि समय पर राशि खर्च नहीं हुई तो क्या होगा?
पंचायतों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है और विभागीय कार्रवाई हो सकती है।