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Kangra News: वायनाड त्रासदी में शहीद इंजीनियर विक्रम राणा का पैतृक गांव में अंतिम संस्कार

प्रमुख तथ्य केरल के वायनाड में हुई भीषण प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले इंजीनियर विक्रम राणा का सोमवार, 13 जुलाई 2026 को उनके पैतृक गांव टकोली घिरथा, फतेहपुर उपमंडल, कांगड़ा में अंतिम संस्कार कर…

प्रमुख तथ्य

केरल के वायनाड में हुई भीषण प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले इंजीनियर विक्रम राणा का सोमवार, 13 जुलाई 2026 को उनके पैतृक गांव टकोली घिरथा, फतेहपुर उपमंडल, कांगड़ा में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान पूरा गांव गमगीन था और बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

विस्तृत जानकारी

इंजीनियर विक्रम राणा (50), पुत्र रंजीत सिंह, 7 जुलाई 2026 को वायनाड में आई प्राकृतिक आपदा के दौरान लापता हो गए थे। केरल सरकार और राहत दलों द्वारा छह दिनों तक चलाए गए गहन सर्च ऑपरेशन के बाद उनका शव बरामद हुआ। सोमवार को उनका पार्थिव शरीर वायु मार्ग से अमृतसर एयरपोर्ट लाया गया, जहां से सड़क मार्ग द्वारा दोपहर करीब एक बजे उनके पैतृक गांव पहुंचाया गया।

अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि

शव के घर पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और पूरा माहौल गमगीन हो गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने भाग लेकर उन्हें नम आंखों से विदाई दी। मृतक के पुत्र हिमांशु ने उन्हें मुखाग्नि दी। ग्रामीणों ने विक्रम राणा को एक मिलनसार और मेहनती व्यक्ति बताते हुए उनके निधन को क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

प्रभाव और संदेश

यह घटना प्राकृतिक आपदाओं की भयावहता और उनसे निपटने की तैयारियों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। विक्रम राणा के परिवार और समुदाय ने इस दुखद घटना में एकजुटता दिखाई।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

  • प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करें।
  • प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों को गंभीरता से लें।
  • आपदा प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा करने से बचें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विक्रम राणा कौन थे?

विक्रम राणा (50) हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के फतेहपुर उपमंडल के टकोली घिरथा गांव के निवासी थे और पेशे से इंजीनियर थे।

उनकी मृत्यु कैसे हुई?

वे केरल के वायनाड में 7 जुलाई 2026 को आई प्राकृतिक आपदा में लापता हो गए थे और छह दिनों की तलाश के बाद उनका शव बरामद हुआ।

अंतिम संस्कार कहां और कब हुआ?

उनका अंतिम संस्कार 13 जुलाई 2026 को उनके पैतृक गांव टकोली घिरथा में किया गया।

अंतिम संस्कार में कौन शामिल हुआ?

बड़ी संख्या में ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने भाग लिया, और उनके पुत्र हिमांशु ने मुखाग्नि दी।

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