मुख्य तथ्य
गगल हवाई अड्डा विस्तारीकरण संघर्ष समिति ने धर्मशाला में आयोजित एक बैठक में सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति पर कड़ी आपत्ति जताई। समिति के अध्यक्ष रजनीश मोना ने कहा कि प्रशासन द्वारा समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के जरिए भूमि खाली करने का नोटिस जारी करना तानाशाही रवैये का प्रमाण है।
विस्तार से
रजनीश मोना ने बताया कि सरकार ने अब तक प्रभावित लोगों को परियोजना के अनुसार उचित मूल्य नहीं दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को ठगकर जबरन भूमि से हटाया जा रहा है। सरकार ने मनमाने ढंग से यह नियम बना लिया है कि पहले भूमि का कब्जा लिया जाएगा, उसके बाद ही आरएंडआर का भुगतान किया जाएगा।
बरसात में विस्थापन पर आपत्ति
समिति ने विशेष रूप से बरसात के मौसम में विस्थापन की प्रक्रिया शुरू करने पर नाराजगी जताई। मोना ने कहा, 'सरकार अपनी पट्टिका लगाने के लिए लोगों को बरसात के मौसम में उठाने का काम कर रही है।' उन्होंने सरकार से मांग की कि पहले विस्थापितों को उचित तरीके से बसाया जाए, उसके बाद ही कब्जा लिया जाए।
प्रभाव और प्रतिक्रिया
समिति का कहना है कि सरकार का यह रवैया लोगों के बीच अविश्वास और बिखराव पैदा कर रहा है। मोना ने लोगों से एकजुट होकर समस्या का समाधान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि लोग बिखर गए तो सरकार को अपनी मनमानी करने का मौका मिल जाएगा।
समिति की मांगें
- आरएंडआर के तहत विस्थापितों को एयरोसिटी में आठ मरला भूमि प्रदान की जाए।
- भूमि का कब्जा लेने से पहले सभी प्रभावितों को उचित मुआवजा दिया जाए।
- विस्थापन की प्रक्रिया बरसात के मौसम में न की जाए।
FAQ
गगल हवाई अड्डा विस्तारीकरण संघर्ष समिति की मुख्य मांग क्या है?
समिति की मांग है कि आरएंडआर के तहत विस्थापितों को एयरोसिटी में आठ मरला भूमि दी जाए ताकि वे अपना व्यवसाय जारी रख सकें।
समिति ने सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
समिति ने आरोप लगाया है कि सरकार बिना उचित मुआवजा दिए और बरसात के मौसम में लोगों को जबरन भूमि से हटा रही है, जो तानाशाही रवैया है।
विस्थापितों को अब तक मुआवजा क्यों नहीं मिला?
समिति के अनुसार, सरकार ने परियोजना के आधार पर उचित कीमत नहीं दी और अब पहले कब्जा लेने के बाद मुआवजा देने की नीति अपना रही है।