मुख्य तथ्य
हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) का स्थायी हाई एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर केलांग के समीप गुस्कियार में बनाया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा 11 जुलाई 2026 को इस केंद्र की आधारशिला रखेंगे।
विस्तार से जानकारी
ICMR की गतिविधियाँ केलांग में वर्ष 2015 में एक फील्ड स्टेशन के रूप में शुरू हुई थीं। प्रारंभ में यह केंद्र नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन ट्राइबल हेल्थ, जबलपुर के अधीन संचालित हुआ, जबकि वर्तमान में इसका संचालन रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर, गोरखपुर कर रहा है। स्थायी परिसर बनने से आधुनिक प्रयोगशालाएँ, अनुसंधान सुविधाएँ और प्रशिक्षण अवसंरचना विकसित की जाएगी।
अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्र
- उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएँ
- हृदय एवं श्वसन रोग
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य
- संक्रामक और गैर-संचारी रोग
- जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य और पोषण
- जलवायु परिवर्तन का मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव
- महामारी निगरानी और टेलीमेडिसिन
पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने बताया कि यह केंद्र उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य, जनजातीय समुदायों और ऊंचाई से जुड़ी बीमारियों पर वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देगा।
प्रभाव और महत्व
इस रिसर्च सेंटर के बनने से लाहौल-स्पीति और आसपास के उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों के निवासियों को स्वास्थ्य सेवाओं और अनुसंधान का लाभ मिलेगा। यह केंद्र स्थानीय स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रदान करेगा और टेलीमेडिसिन जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देगा।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- शिलान्यास समारोह 11 जुलाई 2026 को केलांग के समीप गुस्कियार में होगा।
- यह केंद्र ICMR के तहत कार्य करेगा और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों के स्वास्थ्य अनुसंधान में मील का पत्थर साबित होगा।
- स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और अनुसंधान का लाभ मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
हाई एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर कहाँ बनेगा?
यह केंद्र हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले के मुख्यालय केलांग के समीप गुस्कियार में स्थापित किया जाएगा।
शिलान्यास कब और कौन करेगा?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा 11 जुलाई 2026 को इस केंद्र का शिलान्यास करेंगे।
इस केंद्र में किन विषयों पर शोध होगा?
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी, हृदय एवं श्वसन रोग, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य और पोषण, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, महामारी निगरानी और टेलीमेडिसिन पर अनुसंधान किया जाएगा।