Desh Duniya | Avay Shukla

जुलाई: भारतीय करदाताओं के लिए सबसे क्रूर महीना

मुख्य तथ्य टी.एस. एलियट ने अप्रैल को ‘सबसे क्रूर महीना’ कहा था, लेकिन भारतीय करदाताओं के लिए जुलाई सबसे क्रूर है। इस महीने में आयकर रिटर्न दाखिल करने और भारी कर चुकाने का समय होता…

मुख्य तथ्य

टी.एस. एलियट ने अप्रैल को 'सबसे क्रूर महीना' कहा था, लेकिन भारतीय करदाताओं के लिए जुलाई सबसे क्रूर है। इस महीने में आयकर रिटर्न दाखिल करने और भारी कर चुकाने का समय होता है। एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और लेखक अवय शुक्ला ने इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है।

कर प्रणाली पर कटाक्ष

शुक्ला के अनुसार, जुलाई में उन्हें अपनी वार्षिक आय का एक चौथाई हिस्सा कर के रूप में चुकाना पड़ता है, जिसमें पेंशन, ब्याज, पूंजीगत लाभ और रॉयल्टी शामिल हैं। वे सवाल उठाते हैं कि सरकार बिना किसी बदले में इतना बड़ा हिस्सा क्यों लेती है।

पूंजीगत लाभ कर पर आपत्ति

शुक्ला का तर्क है कि संपत्ति या शेयरों की कीमतों में वृद्धि सरकार की नीतियों के कारण नहीं, बल्कि जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण और बाजार की अनियमितताओं के कारण होती है। इसलिए सरकार को पूंजीगत लाभ कर का हक नहीं है।

लेखकों पर कर अनुचित

वे मानते हैं कि लेखक समाज में पढ़ने की आदत को बनाए रखने का काम करते हैं, लेकिन अधिकांश लेखक बहुत कम कमाते हैं। उनकी रॉयल्टी पर कर लगाना उनके बौद्धिक अधिकारों पर हमला है।

कर प्रणाली की विसंगतियां

शुक्ला ने यह भी उल्लेख किया कि अब बैंक जमानत राशि के लिए विशेष सावधि जमा योजनाएं पेश कर रहे हैं, जिन पर ब्याज कर योग्य है। उन्होंने व्यंग्यात्मक रूप में कहा कि 'टैक्सिडर्मिस्ट' और 'टैक्समैन' में केवल इतना अंतर है कि एक मरने के बाद और दूसरा जीते-जी खाल करता है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

  • जुलाई में आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा होती है, जिसमें देरी पर जुर्माना लग सकता है।
  • पूंजीगत लाभ कर और अन्य करों के बारे में जागरूक रहें और योजना बनाएं।
  • लेखकों और कलाकारों के लिए कर छूट के प्रावधानों की जानकारी लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लेखक के अनुसार जुलाई को सबसे क्रूर महीना क्यों कहा गया है?

लेखक का मानना है कि जुलाई में आयकर दाखिल करने और बड़ी राशि कर के रूप में चुकाने के कारण यह महीना सबसे क्रूर है।

लेखक पूंजीगत लाभ कर का विरोध क्यों करते हैं?

उनके अनुसार, संपत्ति या शेयरों की कीमतों में वृद्धि सरकार की नीतियों के कारण नहीं, बल्कि जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण और अन्य कारकों से होती है, इसलिए सरकार को इस कर का हक नहीं है।

लेखक के अनुसार लेखकों पर कर लगाना क्यों अनुचित है?

लेखकों का तर्क है कि वे पढ़ने की आदत को जीवित रखने का सार्वजनिक सेवा करते हैं, और अधिकांश लेखक बहुत कम कमाते हैं, इसलिए उनकी रॉयल्टी पर कर लगाना अनुचित है।

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