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भारत में gi रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड: 2025-26 में 125 नए उत्पादों को मिला टैग

मुख्य तथ्य भारत में अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 125 नए उत्पादों को भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्रदान किए गए। इस अवधि में मध्य प्रदेश ने 26 GI के साथ शीर्ष स्थान प्राप्त…

मुख्य तथ्य

भारत में अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 125 नए उत्पादों को भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्रदान किए गए। इस अवधि में मध्य प्रदेश ने 26 GI के साथ शीर्ष स्थान प्राप्त किया, जबकि पश्चिम बंगाल ने 24 और हिमाचल प्रदेश ने 13 GI दर्ज कराए। देश में अब कुल 822 GI पंजीकृत हो चुके हैं।

राज्यवार GI रजिस्ट्रेशन

मध्य प्रदेश से खजुराहो स्टोन क्राफ्ट, बेतूल भरेवा मेटल क्राफ्ट, ग्वालियर पेपर माशे क्राफ्ट और ग्वालियर स्टोन क्राफ्ट हैंडीक्राफ्ट को GI मिला। इसके अलावा चार आदिवासी फसलों—सीताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैंगनी अरहर और महाकोशल छत्रिया चावल—को भी टैग दिया गया। ये फसलें बैगा और गोंड जनजातियों का मुख्य भोजन हैं।

पश्चिम बंगाल में चंद्रनगर के जलभरा, जनई के मनोहरा, शांतिनिकेतन बाटिक, शांतिनिकेतन एकतारा, बेलियाटोर के मेचा संदेश, बांग्लार नोलेन गुड़, कनकचूर पॉप्ड राइस, कृष्णानगर की मिट्टी की गुड़िया, कूचबिहार की सीतालपाटी, बिक्रमपुर का बंगाल सिंगिंग बाउल, हुगली की बालागढ़ बोट और कोलकाता के कोलकाती ज्वैलरी को GI मिला। इनमें से 13 GI वेस्ट बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिडिकल साइंसेज (WBNUJS) के DPIIT चेयर द्वारा सुरक्षित किए गए। कुलाधिपति ओ.वी. नंदीमथ ने कहा, “यह हमारे IP चेयर के शानदार काम का परिणाम है, जो WBNUJS के सामाजिक परिवर्तन के संकल्प को दर्शाता है।” पश्चिम बंगाल के मंत्री कल्याण चक्रवर्ती ने कहा, “GI केवल आभूषण नहीं रह सकता, हमें उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखनी होगी और बाजार के बारे में सोचना होगा।”

झारखंड ने 11 नए GI दर्ज कराए, जिनमें टसर सिल्क साड़ी, आदिवासी ज्वैलरी, बांस क्राफ्ट, डोकरा क्राफ्ट, कुचाई सिल्क, भगैया साड़ी, दुमका चादर बदोनी पपेट्स, पंची परहान साड़ी, केशरिया कलाकंद, बेनाम और जादुपतिया पेंटिंग शामिल हैं। JHARCRAFT की प्रबंध निदेशक गरिमा सिंह ने कहा, “GI रजिस्ट्रेशन शिल्प की प्रामाणिकता की रक्षा करते हैं और कारीगरों के लिए राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय बाजार खोलते हैं।” उन्होंने बताया कि 12 और आवेदन GI रजिस्ट्री में विचाराधीन हैं।

हिमाचल प्रदेश ने 13 GI दर्ज कराए, जबकि गुजरात और लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश) ने 7-7, असम ने 6, और उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु तथा गोवा ने 5-5 GI प्राप्त किए।

GI का महत्व और प्रभाव

GI टैग उत्पादों की भौगोलिक उत्पत्ति और विशिष्ट गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। यह कारीगरों और किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य दिलाने में मदद करता है। भारत में GI पंजीकरण वस्तुओं के भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत किया जाता है। कुल 822 GI में से 53% हस्तशिल्प और 31% कृषि उत्पाद हैं। राज्यवार, उत्तर प्रदेश के पास सबसे अधिक GI हैं, उसके बाद तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल का स्थान है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

GI रजिस्ट्रेशन से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलती है और पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। हिमाचल प्रदेश के नागरिकों को अपने राज्य के 13 नए GI उत्पादों पर गर्व होना चाहिए, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

GI टैग क्या होता है?

GI या भौगोलिक संकेत एक ऐसा चिह्न है जो किसी उत्पाद की विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति और उससे जुड़ी गुणवत्ता या प्रतिष्ठा को दर्शाता है।

2025-26 में सबसे अधिक GI रजिस्ट्रेशन किस राज्य ने कराए?

मध्य प्रदेश ने 26 GI के साथ सबसे अधिक रजिस्ट्रेशन कराए, उसके बाद पश्चिम बंगाल (24) और हिमाचल प्रदेश (13) का स्थान रहा।

हिमाचल प्रदेश को कितने नए GI मिले?

हिमाचल प्रदेश को 2025-26 में 13 नए GI टैग मिले, जो राज्य के हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों को बढ़ावा देंगे।

भारत में कुल कितने GI पंजीकृत हैं?

अब तक भारत में कुल 822 उत्पादों को GI टैग मिल चुका है, जिनमें से 53% हस्तशिल्प और 31% कृषि उत्पाद हैं।

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