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केरल में सात वर्षीय बालक बना सबसे कम उम्र के अंगदाताओं में से एक

प्रमुख तथ्य केरल में एक सात वर्षीय बालक सबसे कम उम्र के अंगदाताओं में शामिल हो गया है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल इस बालक को ब्रेन-डेड घोषित कर दिया गया था, जिसके…

प्रमुख तथ्य

केरल में एक सात वर्षीय बालक सबसे कम उम्र के अंगदाताओं में शामिल हो गया है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल इस बालक को ब्रेन-डेड घोषित कर दिया गया था, जिसके बाद उसके परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया। इससे छह लोगों को नया जीवन मिला है।

दुर्घटना और उपचार

लोकिनेनी याशवान, मूल रूप से हैदराबाद के तिरुमलगिरी जिले के निवासी, तिरुनेलवेली जिले के राधापुरम तालुक में रहते थे। 29 जून की रात को अनुविजय टाउनशिप में वह साइकिल से सड़क पार कर रहे थे, तभी एक एम्बुलेंस ने उन्हें टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल बालक को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और उसी रात उसे तिरुवनंतपुरम स्थित किम्सहेल्थ (KIMSHEALTH) के गहन चिकित्सा इकाई में स्थानांतरित कर दिया गया।

अंगदान का निर्णय

5 जुलाई को ब्रेनस्टेम डेथ की पुष्टि होने पर माता-पिता लोकिनेनी रघु और सौम्या पप्पाराव ने अंगदान की इच्छा जताई। केरल नेटवर्क फॉर ऑर्गन शेयरिंग (KNOS) के समन्वय से अंगदान प्रक्रिया शुरू हुई।

अंग प्रत्यारोपण और हरित गलियारा

सोमवार सुबह, केरल पुलिस की मदद से एक गुर्दे को तिरुवनंतपुरम से कोझिकोड स्थित आईक्यूआरएए अस्पताल ले जाने के लिए हरित गलियारा बनाया गया। यह गुर्दा कन्नूर के 17 वर्षीय किशोर को प्रत्यारोपित किया जाना है, जो अंतिम चरण की गुर्दे की बीमारी से पीड़ित था।

कुल छह अंग — दोनों गुर्दे, लिवर, कॉर्निया और हृदय वाल्व — राज्य भर के विभिन्न अस्पतालों में जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपित किए गए। लिवर किम्सहेल्थ में एक मरीज को, जबकि एक गुर्दा कोट्टायम के चार वर्षीय बच्चे को सरकारी मेडिकल कॉलेज, तिरुवनंतपुरम में प्रत्यारोपित किया गया। दोनों कॉर्निया क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान (Regional Institute of Ophthalmology) और हृदय वाल्व श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (SCTIMST) को सौंपे गए।

प्रभाव और संदेश

यह घटना अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली है। एक परिवार के इस निस्वार्थ निर्णय ने कई लोगों को जीवनदान दिया है। केरल में अंगदान की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए यह एक मिसाल है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोकिनेनी याशवान कौन थे?

लोकिनेनी याशवान हैदराबाद के तिरुमलगिरी जिले के रहने वाले सात वर्षीय बालक थे, जो तिरुनेलवेली जिले के राधापुरम तालुक में रहते थे।

उनके अंगों का क्या हुआ?

उनके दोनों गुर्दे, लिवर, कॉर्निया और हृदय वाल्व सहित छह अंग विभिन्न अस्पतालों में जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपित किए गए।

हरित गलियारा क्यों बनाया गया?

एक गुर्दे को तिरुवनंतपुरम से कोझिकोड स्थित आईक्यूआरएए अस्पताल ले जाने के लिए हरित गलियारा बनाया गया, ताकि अंग समय पर पहुंच सके।

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