मुख्य तथ्य
विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर आंध्र विश्वविद्यालय के जनसंख्या अनुसंधान केंद्र और सांख्यिकी विभाग ने संयुक्त रूप से एक कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम शनिवार, 11 जुलाई 2026 को विशाखापट्टनम में हुआ।
कार्यक्रम का विवरण
मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय पेट्रोलियम और ऊर्जा संस्थान (IIPE) के संस्थापक निदेशक और सेवानिवृत्त प्रोफेसर वी.एस.आर.के. प्रसाद ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विज्ञान और सार्वजनिक नीति में सांख्यिकी की बढ़ती प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को जनसंख्या अनुसंधान, जनगणना अध्ययन और पर्यावरण विज्ञान में अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया।
सम्मानित अतिथि आंध्र प्रदेश जनगणना संचालन निदेशालय के संयुक्त निदेशक बी.वी.एल. साई सेखर ने जनसांख्यिकी और जनसंख्या अध्ययन में करियर के अवसरों पर बात की। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के प्राचार्य एम.वी.आर. राजू ने जीवनशैली रोगों और छात्रों द्वारा सतत विकास में योगदान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
केंद्र के मानद निदेशक और सांख्यिकी विभाग के प्रमुख बी. मुनिस्वामी ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण कार्यक्रमों के कार्यान्वयन पर केंद्र के शोध को रेखांकित किया।
प्रतियोगिताएं और भागीदारी
इस अवसर पर निबंध लेखन और वाक्पटुता प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए गए। छात्रों ने रंगोली और पेंटिंग भी प्रस्तुत की। कुल मिलाकर लगभग 160 लोगों ने भाग लिया, जिनमें छात्र, शोधकर्ता और विभागीय कर्मचारी शामिल थे।
प्रभाव और महत्व
यह कार्यक्रम जनसंख्या मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने और युवाओं को जनसंख्या अनुसंधान और सार्वजनिक नीति में करियर बनाने के लिए प्रेरित करने में सहायक रहा।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
विश्व जनसंख्या दिवस हर साल 11 जुलाई को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य जनसंख्या के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना है। इस वर्ष के कार्यक्रम ने डेटा विज्ञान और स्वास्थ्य नीति में सांख्यिकी की भूमिका पर प्रकाश डाला।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विश्व जनसंख्या दिवस कब मनाया जाता है?
विश्व जनसंख्या दिवस प्रतिवर्ष 11 जुलाई को मनाया जाता है।
इस वर्ष विश्व जनसंख्या दिवस का मुख्य विषय क्या था?
कार्यक्रम में जनसंख्या अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विज्ञान और सार्वजनिक नीति में सांख्यिकी की बढ़ती प्रासंगिकता पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में कितने लोगों ने भाग लिया?
लगभग 160 लोगों ने भाग लिया, जिनमें छात्र, शोधकर्ता और विभागीय कर्मचारी शामिल थे।