हिमाचल प्रदेश में फार्मास्यूटिकल कंपनियों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं क्योंकि हाल ही में 47 दवाओं के नमूनों में गुणवत्ता परीक्षण में असफलता दर्ज की गई है। यह जानकारी केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन द्वारा जारी मासिक दवा अलर्ट में सामने आई है।
दवाओं की गुणवत्ता में कमी
इन दवाओं में से अधिकांश आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाएं हैं, जैसे कि अमोक्सिसिलिन और पोटेशियम क्लेवुलानेट टैबलेट, डाइक्लोफेनाक पोटेशियम, पेरासिटामोल और क्लोरजोक्साजोन टैबलेट। इन दवाओं का उपयोग बैक्टीरियल संक्रमण, सूजन, उच्च रक्तचाप, मतली, उच्च यूरिक एसिड, परजीवी संक्रमण, पेट के अल्सर, पुराने दर्द और एलर्जी जैसी बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है।
फार्मास्यूटिकल कंपनियों की जांच
नालागढ़ स्थित एक इकाई जो इंजेक्शन के लिए स्टेराइल पानी बनाती है, उसमें स्टेरिलिटी की कमी पाई गई, जिससे उसके उत्पादन प्रोटोकॉल को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न हुईं। कई इंजेक्टेबल दवाएं भी गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं। डाइक्लोफेनाक सोडियम इंजेक्शन पहचान परीक्षण में खरा नहीं उतरा और उसकी शक्ति प्रभावित हुई। पोविडोन-आयोडिन समाधान, जो छोटे घावों, कटने, घर्षण और जलने के इलाज और रोकथाम के लिए और प्री-ऑपरेटिव त्वचा कीटाणुनाशक के रूप में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, उसमें भी असेसे में कमी पाई गई।
इन दवाओं का निर्माण ऊना, बद्दी बरोटीवाला नालागढ़, परवाणू, काला अंब, कांगड़ा और पौंटा साहिब में स्थित कंपनियों द्वारा किया गया है। प्रयोगशाला परीक्षण में गंभीर कमियां पाई गईं, जिनमें घुलनशीलता, असेसे, सामग्री एकरूपता, पीएच स्तर, स्टेरिलिटी, माइक्रोबियल संदूषण, अपघटन और लेबलिंग शामिल हैं। कुछ दवाएं गलत तरीके से ब्रांडेड पाई गईं, जबकि दूसरों में सक्रिय संघटक निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता था। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी खामियां दवा की प्रभावशीलता को कम कर सकती हैं या मरीजों के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं।
राज्य दवा नियंत्रक की प्रतिक्रिया
राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने कहा कि यह मामला गंभीर है और इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों की दवाएं असफल पाई गई हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला फार्मास्यूटिकल कंपनियों की गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल उठाता है और मरीजों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर देता है।
English summary: The pharmaceutical industry in Himachal Pradesh is under scrutiny after 47 drug samples failed to meet quality standards. The failed drugs include commonly used medicines for bacterial infections, inflammation, hypertension, and other ailments. The state drug controller has assured that action will be taken against the companies whose drugs failed the quality test. This incident raises concerns about the quality control measures in place and highlights the need for stricter regulations to ensure patient safety. META: फार्मास्यूटिकल कंपनियों की गुणवत्ता पर सवाल, 47 दवाओं के नमूने असफल, राज्य दवा नियंत्रक ने जांच का आश्वासन दिया।