परिचय
पिछले एक दशक में भारत की शिक्षा प्रणाली कई पेपर लीक घोटालों से हिल गई है। AIPMT से लेकर NEET-UG तक, इन घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों को उजागर किया है। यहाँ प्रमुख घोटालों की सूची दी गई है।
2015: AIPMT पेपर लीक
3 मई 2015 को आयोजित ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट (AIPMT) में 90 उत्तर कुंजियाँ इलेक्ट्रॉनिक रूप से लीक हुईं। अभ्यर्थियों ने 15-20 लाख रुपये देकर ये कुंजियाँ खरीदीं। रोहतक पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें दो डॉक्टर और एक MBBS छात्र शामिल थे।
2018: CBSE कक्षा 10 गणित और कक्षा 12 अर्थशास्त्र पेपर लीक
प्रश्नपत्र व्हाट्सएप के जरिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लीक हुए। दिल्ली पुलिस ने तीन शिक्षकों—ऋषभ, रोहित और तौकीर—को गिरफ्तार किया। बोर्ड ने 28 लाख छात्रों के लिए पुनः परीक्षा आयोजित की।
2021: REET पेपर लीक
26 सितंबर 2021 को आयोजित राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) का प्रश्नपत्र परीक्षा से दो दिन पहले लीक हो गया। पुलिस जांच में पता चला कि प्रश्नपत्र राज्य शिक्षा विभाग के कार्यालय से चुराया गया था। आरोपियों ने इसके बदले कम से कम 1.22 करोड़ रुपये प्राप्त किए।
2024 और 2026: NEET-UG पेपर लीक
5 मई 2024 को आयोजित NEET-UG में पेपर लीक के आरोप लगे। पटना, बिहार में पुलिस ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने 30-50 लाख रुपये देकर प्रश्नपत्र प्राप्त किया था। गोधरा, गुजरात में एक परीक्षा केंद्र पर उप अधीक्षक ने छात्रों को अनुत्तरित प्रश्न छोड़ने का निर्देश दिया और बाद में उत्तर भरने का वादा किया। पाँच लोग गिरफ्तार हुए। मामला CBI को सौंपा गया।
2026 में 3 मई को आयोजित NEET-UG में भी पेपर लीक के आरोप लगे। केंद्र सरकार ने परीक्षा रद्द कर पुनः परीक्षा की घोषणा की। मामला CBI को सौंपा गया।
2024: UGC NET रद्द
जून 2024 में आयोजित UGC NET को शिक्षा मंत्रालय ने रद्द कर दिया। राष्ट्रीय साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट और भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) से मिली सूचना के बाद यह निर्णय लिया गया। मामला CBI को सौंपा गया।
2026: महाराष्ट्र TET पेपर लीक
28 जून 2026 को आयोजित महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को राज्य सरकार ने स्थगित कर दिया। एक दिन पहले भिवंडी पुलिस को सूचना मिली कि कुछ लोगों के पास प्रश्नपत्र है। छापेमारी में जब्त दस्तावेजों के प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए।
निष्कर्ष
इन घटनाओं ने सरकार को सख्त कानून और डिजिटल सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है, लेकिन हर नया घोटाला नई कमजोरियाँ उजागर करता है। पेपर लीक से न केवल छात्र प्रभावित होते हैं, बल्कि पूरी शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को ठेस पहुँचती है।