Kerala Schools में Lipstick Addiction: बच्चों पर सस्ते कॉस्मेटिक्स का खतरनाक असर
केरल के कोल्लम जिले के सरकारी स्कूलों की दीवारों पर अब लिपस्टिक के निशान आम हो गए हैं। यह सिर्फ एक मासूम शरारत नहीं, बल्कि एक गंभीर समस्या का संकेत है। स्कूली बच्चे, जिनमें से कुछ की उम्र महज 10 साल है, सस्ते कॉस्मेटिक्स के आदी होते जा रहे हैं। यह ट्रेंड न सिर्फ सेहत के लिए खतरनाक है, बल्कि इसके मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी चिंताजनक हैं।
क्या है मामला?
कोल्लम शहर के आसपास के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों ने देखा कि छात्राएं ₹50 से भी कम कीमत के लिपस्टिक का इस्तेमाल कर रही हैं। ये उत्पाद इतने सस्ते होते हैं कि इनमें गुणवत्ता की उम्मीद नहीं की जा सकती। शिक्षकों के अनुसार, यह आदत अब एक लत में बदल गई है। बच्चे स्कूल में प्रतिबंध के बावजूद छिपाकर लिपस्टिक लाते हैं और स्कूल के बाहर जाकर लगा लेते हैं।
क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड?
इस ट्रेंड के पीछे सोशल मीडिया का बड़ा हाथ है। बच्चे 'Get Ready With Me' (GRWM) वीडियो देखकर प्रभावित होते हैं, जहां छोटे इन्फ्लुएंसर मेकअप रूटीन दिखाते हैं। साथ ही, स्कूलों के आसपास की दुकानों पर ये सस्ते कॉस्मेटिक्स पेन और नोटबुक की तरह आसानी से मिल जाते हैं। एक शिक्षक ने बताया, 'बच्चे ये लिपस्टिक अपने बैग में छिपाकर लाते हैं और स्कूल के गेट के बाहर जाकर लगा लेते हैं। बाल अधिकार कानूनों के चलते हम उन्हें जबरदस्ती रोक नहीं सकते।'
सेहत पर क्या असर?
सस्ते कॉस्मेटिक्स में पैराबेंस और हेवी मेटल्स जैसे खतरनाक रसायन पाए जाते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इनके नियमित इस्तेमाल से एनीमिया और न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। थिरुवल्ला के बिलीवर्स चर्च मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जिजो जोसेफ जॉन ने बताया, 'इतनी कम उम्र में कॉस्मेटिक्स का इस्तेमाल शुरू करने से बच्चों में बॉडी इमेज की गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं। वे बिना मेकअप के खुद को अधूरा महसूस करने लगते हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि कुछ आईलाइनर में लेड की मात्रा इतनी अधिक होती है कि पश्चिमी देशों में इसके इस्तेमाल से लेड पॉइजनिंग की जांच की जाती है।
समाधान के प्रयास
इस बढ़ती समस्या से निपटने के लिए कोल्लम चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल (CWC) ने 'lipstick-free campus' अभियान शुरू किया है। CWC के सचिव डी. शाइन देव ने बताया, 'अभियान शुरू करने के बाद हमें पूरे केरल से स्कूलों के फोन आए, जहां यही समस्या थी। यह कोई अकेला मामला नहीं, बल्कि पूरे राज्य में फैला एक ट्रेंड है।' हालांकि, छात्रों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है, क्योंकि वे इन उत्पादों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा मान चुके हैं।
क्या कहता है कानून?
फिलहाल, नशीले पदार्थों की तरह कॉस्मेटिक्स की बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि बाल अधिकार कानूनों के तहत वे बच्चों को इन उत्पादों के इस्तेमाल से जबरदस्ती नहीं रोक सकते। यह एक कानूनी खाई है, जिसे भरने की जरूरत है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
केरल के स्कूलों में लिपस्टिक एडिक्शन क्यों बढ़ रहा है?
सोशल मीडिया पर बच्चों के GRWM वीडियो और सस्ते कॉस्मेटिक्स की आसान उपलब्धता इसका मुख्य कारण है। बच्चे ₹50 से कम कीमत के लिपस्टिक खरीदकर स्कूल लाते हैं।
सस्ते लिपस्टिक से बच्चों की सेहत पर क्या असर पड़ता है?
इनमें पैराबेंस और हेवी मेटल्स जैसे खतरनाक रसायन होते हैं, जो एनीमिया और न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर का कारण बन सकते हैं।
स्कूल इस समस्या से निपटने के लिए क्या कर रहे हैं?
स्कूलों में लिपस्टिक पर प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन बच्चे स्कूल के बाहर जाकर फिर से लगा लेते हैं। Kollam Child Welfare Council ने 'lipstick-free campus' अभियान शुरू किया है।
क्या इस समस्या का कोई कानूनी समाधान है?
फिलहाल नशीले पदार्थों की तरह कॉस्मेटिक्स की बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं है। बच्चों के अधिकार कानून के तहत स्कूल उन्हें जबरदस्ती रोक नहीं सकते।
Source: www.thehindu.com