मुख्य तथ्य
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने गुरुवार को रक्षा, परमाणु ऊर्जा, व्यापार, शिक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों सहित कई क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें 2014 के नागरिक परमाणु समझौते को लागू करने का प्रशासनिक ढांचा भी शामिल है, जिससे ऑस्ट्रेलिया से भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम की आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने मेलबर्न में तीसरे वार्षिक भारत-ऑस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन के दौरान इन समझौतों की घोषणा की।
रणनीतिक साझेदारी का विस्तार
प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों को 'जीवंत लोकतंत्र', 'बहुसांस्कृतिक समाज' और 'महत्वपूर्ण महासागरीय शक्तियां' बताया। उन्होंने कहा कि वे मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता, नेविगेशन की स्वतंत्रता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करेंगे। अल्बानीज़ ने कहा, 'हमारी साझेदारी पहले से कहीं अधिक सार्थक है।' दोनों नेताओं ने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) पर काम तेज करने और द्विपक्षीय निवेश संधि पर प्रगति लाने का निर्णय लिया।
परमाणु समझौता और ऊर्जा सहयोग
2014 के नागरिक परमाणु समझौते को लागू करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था अंतिम रूप दी गई। इससे ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम निर्यात का रास्ता साफ होगा, जिससे भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, गुजरात में 'रूफटॉप सोलर ट्रेनिंग अकादमी' स्थापित करने पर सहमति बनी, जो पीएम सूर्य घर योजना के तहत महिलाओं और युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देगी।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा
दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए संयुक्त घोषणा जारी की। 'भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा नवाचार गलियारा' रक्षा स्टार्टअप और उद्योगों को जोड़ेगा। 'समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप' से इंडो-पैसिफिक में साझा प्रयासों को मजबूती मिलेगी। दोनों पक्ष जहाज निर्माण, मरम्मत और रखरखाव में भी सहयोग करेंगे। अल्बानीज़ ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया भारत को शीर्ष स्तरीय सुरक्षा भागीदार मानता है और रक्षा अभ्यासों की जटिलता बढ़ाई जाएगी।
नियम-आधारित व्यवस्था और वैश्विक मुद्दे
संयुक्त वक्तव्य में दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'स्थिति को बदलने या क्षेत्रीय शांति को कमजोर करने वाली किसी भी अस्थिरकारी या एकतरफा कार्रवाई का कड़ा विरोध' किया और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) का पालन करने पर जोर दिया। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साझा संकल्प व्यक्त किया गया। मोदी ने कहा कि वैश्विक तनाव और संघर्षों का समाधान संवाद और कूटनीति से ही संभव है।
शिक्षा और कौशल विकास
शैक्षिक संबंधों को मजबूत करते हुए, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय को भारत में परिसर स्थापित करने की अनुमति दी। विक्टोरिया विश्वविद्यालय को गुरुग्राम में नया परिसर खोलने की मंजूरी मिली। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया सरकार ने भुवनेश्वर में खनन क्षेत्र में कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का समझौता किया।
सांस्कृतिक और तकनीकी सहयोग
ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 11वीं-12वीं शताब्दी की नंदी मूर्ति, त्रिशूल और स्कंद की मूर्तियां लौटाने पर सहमति ज्ञापित की। दोनों देशों ने साइबर, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और आपूर्ति श्रृंखला (पैक्ट्स) पर साझेदारी शुरू की। ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसीआईटीआई) के तहत त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच किन प्रमुख क्षेत्रों में समझौते हुए?
रक्षा, परमाणु ऊर्जा, व्यापार, शिक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में समझौते हुए।
परमाणु समझौते का क्या महत्व है?
2014 के नागरिक परमाणु समझौते को लागू करने से ऑस्ट्रेलिया से भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
सीईसीए पर क्या प्रगति हुई?
दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) पर काम तेज करने और द्विपक्षीय निवेश संधि पर प्रगति लाने का निर्णय लिया।
रक्षा सहयोग में क्या नया है?
रक्षा और सुरक्षा पर संयुक्त घोषणा, समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप, और भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा नवाचार गलियारा शुरू किया गया।