हिमाचल प्रदेश वन विभाग में एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां ईको टूरिज्म गतिविधियों के नाम पर अवैध वसूली की गई है। यह वसूली एक गैर पंजीकृत कमेटी द्वारा की गई है, जिसने पिछले तीन साल में 11,51,627 रुपये की वसूली कर चुकी है।
अवैध वसूली का मामला
इस मामले में शिकायत विजिलेंस विभाग को भेजी गई है, जिसमें कहा गया है कि यह वसूली बिना किसी अधिकारिक अनुमति के की गई है। यह वसूली स्थानीय लोगों और पर्यटकों से की गई है, जो वन विभाग की जमीन पर आते हैं। यह वसूली का मामला वन विभाग की ओर से चलाई जा रही ईको टूरिज्म गतिविधियों के नाम पर की गई है।
यह मामला हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में सामने आया है, जहां वन विभाग की जमीन पर कई ईको टूरिज्म गतिविधियां चलाई जा रही हैं। इन गतिविधियों में से एक है ट्रेकिंग, जिसमें पर्यटकों को वन विभाग की जमीन पर ले जाकर ट्रेकिंग कराई जाती है। इस ट्रेकिंग के लिए पर्यटकों से 500 से 1000 रुपये तक की वसूली की जाती है।
विजिलेंस जांच
इस मामले में विजिलेंस विभाग ने जांच शुरू कर दी है, जिसमें यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह वसूली कौन कर रहा है और यह पैसा कहां जा रहा है। विजिलेंस विभाग ने वन विभाग के अधिकारियों से भी पूछताछ की है, जिन्होंने कहा है कि उन्हें इस वसूली की जानकारी नहीं थी।
नतीजा
इस मामले में वन विभाग की ओर से कार्रवाई की जा रही है, जिसमें यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह वसूली कौन कर रहा है और यह पैसा कहां जा रहा है। वन विभाग ने कहा है कि वह इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगा और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अंग्रेजी सारांश: In Himachal Pradesh, a case of illegal collection of Rs 11.51 lakh has come to light in the name of eco-tourism activities in the Forest Department. The matter has been reported to the Vigilance Department. The collection was made by an unregistered committee over the past three years. The Vigilance Department has started an investigation into the matter.
META: हिमाचल प्रदेश वन विभाग में ईको टूरिज्म के नाम पर 11.55 लाख की अवैध वसूली का मामला सामने आया है।