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गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय ने मार्कशीट और डिग्रियों में ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ करने का निर्णय लिया

मुख्य तथ्य छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (Guru Ghasidas Central University) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए अपनी मार्कशीट, डिग्री प्रमाणपत्रों और आधिकारिक संचार में ‘इंडिया’ शब्द को हटाकर ‘भारत’ शब्द का…

मुख्य तथ्य

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (Guru Ghasidas Central University) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए अपनी मार्कशीट, डिग्री प्रमाणपत्रों और आधिकारिक संचार में 'इंडिया' शब्द को हटाकर 'भारत' शब्द का उपयोग करने का फैसला किया है। यह जानकारी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अलोक कुमार चक्रवाल ने शनिवार (20 जून, 2026) को दी।

निर्णय का विवरण

विश्वविद्यालय की स्थायी समिति ने लगभग छह महीने पहले इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया था। वर्तमान में विश्वविद्यालय की मार्कशीट और डिग्रियों में अंग्रेजी में 'इंडिया' और हिंदी में 'भारत' दोनों का उल्लेख होता है। नए निर्णय के तहत अंग्रेजी संस्करण में भी 'इंडिया' की जगह 'भारत' लिखा जाएगा। कुलपति ने कहा, "धीरे-धीरे मार्कशीट, डिग्रियों और आधिकारिक संचार में 'इंडिया' शब्द की जगह 'भारत' ले लेगा।" यह परिवर्तन तब लागू होगा जब मार्कशीट और डिग्री प्रमाणपत्रों का मौजूदा स्टॉक समाप्त हो जाएगा।

निर्णय के पीछे तर्क

प्रो. चक्रवाल ने इस निर्णय के पीछे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कारण बताए। उन्होंने 2023 में भारत द्वारा आयोजित G20 शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा, "पिछले साल G20 बैठकों के दौरान माननीय राष्ट्रपति ने आधिकारिक रात्रिभोज निमंत्रण में 'भारत' शब्द का उपयोग किया। जब देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था इस परंपरा का पालन करती है, तो हम भी इसका अनुसरण कर रहे हैं। यह हमारी परंपरा का विषय है।"

उन्होंने आगे कहा, "ऐतिहासिक रूप से, आर्यावर्त और जम्बूद्वीप के क्षेत्र को भारत कहा जाता था। 'इंडिया' नाम विदेशियों द्वारा अपनी सुविधा के लिए दिया गया था। हमें इस बात से निर्देशित होने की आवश्यकता नहीं है कि बाहरी लोग क्या सोचते थे। हमारी संस्कृति और परंपरा ने हमेशा देश को भारत के रूप में संदर्भित किया है, और हम उस परंपरा को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।"

अन्य विश्वविद्यालयों की स्थिति

इस बीच, रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय सहित कुछ राज्य विश्वविद्यालयों के अधिकारियों ने कहा कि अब तक उनके संस्थानों द्वारा ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है और इस संबंध में अधिकारियों से कोई दिशानिर्देश जारी नहीं किए गए हैं।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

यह निर्णय शैक्षणिक दस्तावेजों में राष्ट्रीय पहचान को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम है। हालांकि, यह परिवर्तन तत्काल प्रभाव से नहीं होगा, बल्कि मौजूदा स्टॉक समाप्त होने के बाद लागू होगा। छात्रों और पूर्व छात्रों को अपने प्रमाणपत्रों में बदलाव के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि नए प्रमाणपत्र जारी होने तक पुराने मान्य रहेंगे।

FAQ

गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय ने यह निर्णय क्यों लिया?

विश्वविद्यालय के कुलपति के अनुसार, 'भारत' नाम का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है, और यह राष्ट्रीय परंपरा को मजबूत करने का प्रयास है। उन्होंने G20 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति द्वारा 'भारत' शब्द के उपयोग का उदाहरण दिया।

क्या अन्य विश्वविद्यालयों ने भी ऐसा निर्णय लिया है?

अभी तक इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (रायपुर) और अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (बिलासपुर) जैसे राज्य विश्वविद्यालयों ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है।

यह परिवर्तन कब से लागू होगा?

कुलपति ने बताया कि यह परिवर्तन तब लागू होगा जब मार्कशीट और डिग्री प्रमाणपत्रों का मौजूदा स्टॉक समाप्त हो जाएगा।

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