Flight gaps ground growth of luxury tourism in Himachal

हिमाचल प्रदेश में लक्जरी टूरिज्म की ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए एयर कonnektिविटी बहुत जरूरी है, लेकिन यहां की सरकार की…

हिमाचल प्रदेश में लक्जरी टूरिज्म की ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए एयर कonnektिविटी बहुत जरूरी है, लेकिन यहां की सरकार की कोशिशों के बावजूद भी यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने लगभग 55 हेलिपेड्स बनाए हैं, लेकिन एयरलाइन ऑपरेटर्स इन रूट्स पर सेवाएं चलाने के लिए तैयार नहीं हैं।

एयर कonnektिविटी की समस्या

नागचला में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने की योजना भी फेल हो गई है, और अब गग्गल एयरपोर्ट के रनवे को बढ़ाने की योजना पर काम किया जा रहा है ताकि बोइंग एयरक्राफ्ट भी यहां लैंड कर सकें। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से टूरिज्म इंडस्ट्री में उम्मीदें जगी हैं। कोर्ट ने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री को शिमला के लिए नियमित एयर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसके बाद, एटीआर-42 एयरक्राफ्ट ने शिमला-दिल्ली रूट पर 12 मई से अपनी सेवाएं शुरू की हैं, लेकिन इसके लंबे समय तक चलने को लेकर अभी भी अनिश्चितता है।

पर्यटन उद्योग पर प्रभाव

हिमाचल प्रदेश सरकार एयरलाइन्स को वायबिलिटी गैप फंडिंग प्रदान करती है ताकि उन्हें संभावित नुकसान से बचाया जा सके, लेकिन निजी ऑपरेटर्स शिमला-दिल्ली रूट पर सेवाएं चलाने के लिए उत्साहित नहीं हैं। हाई कोर्ट ने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री को हिमाचल प्रदेश के एयरपोर्ट्स पर बड़े एयरक्राफ्ट चलाने की संभावना का पता लगाने का भी निर्देश दिया है, जिससे हवाई किराए कम हो सकते हैं। फिलहाल, पवन हंसचंडीगढ़-शिमला-चंडीगढ़ रूट पर संजौली हेलिपेड से हेलीकॉप्टर सेवाएं संचालित कर रहा है, लेकिन यह सेवाएं केवल तीन दिनों में चलती हैं और केवल छह यात्रियों को ही जगह मिल पाती है।