मुख्य तथ्य
केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि वह देश के स्कूलों और कॉलेजों में 'व्यापक यौन शिक्षा' लागू करने के लिए तैयार है। सरकार ने राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है और अब सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी का इंतजार है।
विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें
समिति ने कक्षा 6 से क्रमिक दृष्टिकोण के साथ किशोर शिक्षा शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें व्यक्तिगत सुरक्षा, शरीर की जागरूकता, स्वच्छता और सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श जैसे विषयों को शामिल किया जाएगा। यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप होगा।
प्रभाव और महत्व
यह कदम POCSO अधिनियम के तहत सहमति से बने किशोर संबंधों के आपराधिकरण को कम करने के लिए उठाया गया है। समिति ने सिफारिश की है कि सहमति की अवधारणा को छोटे बच्चों के लिए शामिल नहीं किया जाए और माध्यमिक स्तर पर संवेदनशीलता से पेश किया जाए।
पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण
NCERT द्वारा विकसित पाठ्यक्रम में लैंगिक समानता, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा, भावनात्मक भलाई और POCSO जागरूकता शामिल होगी। शिक्षकों को आयु-उपयुक्त वितरण के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, और जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
जागरूकता अभियान
समिति ने समाज और समुदाय स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की सिफारिश की है, जिसमें माता-पिता और अभिभावकों को भी शामिल किया जाएगा। पंचायती राज और शहरी विकास मंत्रालयों को भी जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए जाएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यौन शिक्षा किस कक्षा से शुरू होगी?
विशेषज्ञ समिति ने कक्षा 6 से क्रमिक दृष्टिकोण के साथ यौन शिक्षा शुरू करने की सिफारिश की है।
पाठ्यक्रम में क्या शामिल होगा?
पाठ्यक्रम में लैंगिक समानता, स्वास्थ्य और स्वच्छता, साइबर सुरक्षा, भावनात्मक भलाई, आयु-उपयुक्त यौन शिक्षा और POCSO अधिनियम के बारे में जागरूकता शामिल होगी।
शिक्षकों को कैसे प्रशिक्षित किया जाएगा?
शिक्षकों को आयु-उपयुक्त वितरण के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, और प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा।