प्रदर्शन और मांगें
केरल के स्कूल शिक्षक संघ (AKSTU) ने शनिवार शाम को सचिवालय तक मार्च निकाला, जिसमें उन्होंने कई मांगें उठाईं। इनमें राज्य सरकार से PM SHRI योजना से हटने और संशोधित बजट में सामान्य शिक्षा क्षेत्र की उपेक्षा को ठीक करने की मांग शामिल थी।
PM SHRI योजना पर आपत्ति
AKSTU ने मांग की कि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) सरकार PM SHRI को लागू करने के अपने कदम को छोड़ दे। संघ के अनुसार, यह योजना केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने का एक तरीका है, जो सांप्रदायिकता और भगवाकरण को बढ़ावा देती है।
बजट में कटौती पर नाराजगी
AKSTU के राज्य सचिव के. पद्मनाभन ने संशोधित बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि इसमें सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों की उपेक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि वेतन संशोधन 1 जुलाई 2024 से लागू किया जाना चाहिए था। पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार ने 12वें वेतन संशोधन आयोग की घोषणा की थी, लेकिन चुनावों के कारण आयोग काम नहीं कर सका। नई UDF सरकार ने आयोग का कार्यकाल बढ़ाने के बजाय उसे स्थगित कर दिया।
AKSTU ने कहा कि संशोधित बजट में वेतन वृद्धि के लिए कोई आवंटन नहीं है, और वेतन और पेंशन के लिए पिछली LDF सरकार की तुलना में ₹8,000 करोड़ कम आवंटित किए गए हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता
AKSTU तिरुवनंतपुरम जिला इकाई के अध्यक्ष प्रवीण. एस ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
AKSTU ने किस योजना के खिलाफ प्रदर्शन किया?
AKSTU ने PM SHRI योजना के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसे वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने का साधन बता रहा है।
AKSTU की मुख्य मांगें क्या थीं?
AKSTU ने राज्य सरकार से PM SHRI योजना से हटने, वेतन संशोधन लागू करने और शिक्षा बजट में कटौती को वापस लेने की मांग की।
AKSTU ने बजट पर क्या आपत्ति जताई?
AKSTU ने कहा कि संशोधित बजट में वेतन और पेंशन के लिए पिछली LDF सरकार की तुलना में ₹8,000 करोड़ कम आवंटित किए गए हैं।