मुख्य तथ्य
केरल सरकार ने सुपारी उत्पादन में भारी गिरावट और फसल रोगों से निपटने के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स गठित करने का निर्णय लिया है। यह कदम कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी की अध्यक्षता में वायनाड में सोमवार (15 जून) को हुई उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया।
विस्तार से जानकारी
कृषि मंत्री ने बताया कि कासरगोड से पालक्काड़ तक और कुछ दक्षिणी जिलों में सुपारी किसान गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। पीली पत्ती रोग और फंगल संक्रमण के कारण उत्पादन में तेजी से गिरावट आई है। टास्क फोर्स में कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ केरल कृषि विश्वविद्यालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिक शामिल होंगे।
टास्क फोर्स के कार्य
- उत्पादन में गिरावट और रोग प्रकोप के विशिष्ट कारणों की पहचान करना
- जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की संरचना में बदलाव, उर्वरक और कीटनाशकों के उपयोग से जुड़ी समस्याओं का अध्ययन
- रोग प्रतिरोधी पौध सामग्री अपनाने और प्रभावित पेड़ों के लिए निवारक उपाय सुझाना
प्रभाव और आगे की रणनीति
टास्क फोर्स को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत अध्ययन कर समाधान प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि स्थानीय स्वशासन विभाग के सहयोग से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को एकीकृत कर सुपारी खेती को समर्थन देने के लिए एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके आधार पर स्थायी समाधान विकसित किए जाएंगे।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
यह पहल केरल के सुपारी किसानों के लिए राहत लेकर आ सकती है, जो पिछले कुछ वर्षों से उत्पादन संकट का सामना कर रहे हैं। सरकार का ध्यान वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समस्या के समाधान पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
केरल में सुपारी उत्पादन में गिरावट के मुख्य कारण क्या हैं?
पीली पत्ती रोग और फंगल संक्रमण मुख्य कारण हैं, साथ ही जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की संरचना में बदलाव, और उर्वरक-कीटनाशकों के उपयोग से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं।
टास्क फोर्स में कौन-कौन शामिल होगा?
कृषि विभाग के अधिकारियों के अलावा केरल कृषि विश्वविद्यालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ शामिल होंगे।
टास्क फोर्स को अपनी रिपोर्ट कब तक सौंपनी है?
टास्क फोर्स को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत अध्ययन कर समाधान प्रस्तावित करने का निर्देश दिया गया है।
इस संकट से किन जिलों के किसान प्रभावित हैं?
कासरगोड से पालक्काड़ तक के जिले और कुछ दक्षिणी जिलों के सुपारी किसान गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
स्रोत: www.thehindu.com