मुख्य तथ्य
आंध्र प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पी.वी.एन. माधव ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से चित्तूर जिले में आम किसानों के संकट को दूर करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। माधव ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बताया कि चित्तूर जिले में लगभग 2.5 लाख एकड़ में आम की खेती होती है, जिसमें से 70% में टोटापुरी किस्म की खेती होती है।
विस्तृत जानकारी
किसान प्रति एकड़ 35,000 से 45,000 रुपये तक खर्च करते हैं, लेकिन वर्तमान में उन्हें अपनी उपज के लिए 4 रुपये प्रति किलो से भी कम मूल्य मिल रहा है, जिससे भारी नुकसान हो रहा है। माधव ने कहा कि कीमतों में तेज गिरावट ने हजारों आम उत्पादक परिवारों को वित्तीय संकट में डाल दिया है और चेतावनी दी कि यदि तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और खराब हो सकती है।
प्रभाव और सुझाव
बीजेपी नेता ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह आम पल्प इकाइयों और प्रसंस्करण उद्योगों को किसानों को लाभकारी मूल्य देने का निर्देश दे। उन्होंने आम के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने की व्यवहार्यता की जांच करने और पल्प-प्रसंस्करण क्षेत्र के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के उपाय सुझाने की भी मांग की।
किसानों को क्या करना चाहिए
- किसान अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
- वे आम की बिक्री के लिए सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) का सहारा ले सकते हैं।
- सरकार द्वारा घोषित किसी भी राहत पैकेज के बारे में जानकारी रखें।
FAQ
चित्तूर जिले में आम की खेती कितने एकड़ में होती है?
चित्तूर जिले में लगभग 2.5 लाख एकड़ में आम की खेती होती है।
किसानों को प्रति किलो आम का कितना मूल्य मिल रहा है?
किसानों को प्रति किलो आम का 4 रुपये से भी कम मूल्य मिल रहा है।
बीजेपी नेता ने सरकार से क्या मांग की है?
बीजेपी नेता ने आम के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने और पल्प इकाइयों को उचित मूल्य देने का निर्देश देने की मांग की है।
स्रोत: www.thehindu.com