प्रधानमंत्री का स्वागत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता 'क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने' और 'नेविगेशन और वाणिज्य की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने' में मदद करेगा। यह समझौता युद्ध समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए किया गया है, जिस पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने हैं।
समझौते की पृष्ठभूमि और महत्व
हालांकि यह समझौता अभी एक रूपरेखा मात्र है, लेकिन यह फरवरी 2026 में अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में सबसे बड़ी प्रगति है। इस युद्ध में हजारों लोग मारे गए और वैश्विक ऊर्जा बाजार चरमरा गए। होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से एशिया में चिंताएं कम होंगी, क्योंकि संघर्ष से पहले इस मार्ग से लगभग 90% तेल का परिवहन होता था।
प्रधानमंत्री का बयान
एक्स पर पोस्ट किए गए बयान में प्रधानमंत्री ने कहा कि वे पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के शांति समझौते का स्वागत करते हैं, जिसने 'दुनिया भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान पैदा किया और कई देशों में जानमाल का नुकसान हुआ।' उन्होंने उम्मीद जताई कि समझौते का कार्यान्वयन 'क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने और नेविगेशन और वाणिज्य की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने' में मदद करेगा। उन्होंने आगे कहा, 'हम शेष मुद्दों पर विचार-विमर्श के स्थायी अंतिम समझौते तक पहुंचने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।'
भारत और वैश्विक प्रभाव
इस समझौते से भारत को सीधा लाभ होने की संभावना है, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल की कीमतें बढ़ गई थीं और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई थी। समझौते से न केवल ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता मिलेगी।
आगे की राह
समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने हैं। इसके बाद शेष मुद्दों पर बातचीत जारी रहेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष एक स्थायी समझौते पर पहुंचेंगे, जिससे पश्चिम एशिया में दीर्घकालिक शांति स्थापित हो सके।
FAQ
US-ईरान शांति समझौता कब हस्ताक्षरित होगा?
यह समझौता 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षरित होने वाला है।
इस समझौते का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुलेगा, जिससे भारत सहित एशियाई देशों को तेल आपूर्ति सुगम होगी और ऊर्जा की कीमतें स्थिर रहेंगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते पर क्या प्रतिक्रिया दी?
पीएम मोदी ने इसे पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाल करने वाला कदम बताया और नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की उम्मीद जताई।
स्रोत: www.hindustantimes.com