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केरल के घाटे में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों के पुनर्गठन की सिफारिश, बेवको और सप्लाईको के विलय का सुझाव

मुख्य तथ्य केरल सरकार द्वारा जारी एक श्वेत पत्र में राज्य के घाटे में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों (PSE) के पुनर्गठन की सिफारिश की गई है। इसमें गैर-रणनीतिक PSE को निजीकरण, विनिवेश या बंद करने…

मुख्य तथ्य

केरल सरकार द्वारा जारी एक श्वेत पत्र में राज्य के घाटे में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों (PSE) के पुनर्गठन की सिफारिश की गई है। इसमें गैर-रणनीतिक PSE को निजीकरण, विनिवेश या बंद करने का सुझाव दिया गया है, साथ ही केरल राज्य पेय पदार्थ निगम (बेवको) और केरल नागरिक आपूर्ति निगम (सप्लाईको) के विलय की भी बात कही गई है।

श्वेत पत्र की मुख्य सिफारिशें

पूर्व कैबिनेट सचिव के.एम. चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली समिति ने यह रिपोर्ट तैयार की है, जिसे 4 जून 2026 को विधानसभा में पेश किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB), केरल राज्य परिवहन निगम (KSRTC) और केरल जल प्राधिकरण (KWA) को इस तरह सुधारा जाना चाहिए कि वे राजकोष पर बोझ न बनें। इन तीनों उपक्रमों का घाटा सभी PSE के कुल घाटे का अधिकांश हिस्सा है।

बेवको और सप्लाईको का विलय

समिति ने बेवको और सप्लाईको को एक ही निगम में विलय करने की सिफारिश की है, जिसमें शराब वितरण और नागरिक आपूर्ति के लिए अलग-अलग प्रभाग होंगे। इससे परिचालन दक्षता बढ़ने और संसाधनों के समेकन की उम्मीद है।

PSE के बढ़ते घाटे के आंकड़े

श्वेत पत्र के अनुसार, सभी PSE का संचित घाटा 2021 में 31,517.1 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 72,851.2 करोड़ रुपये हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि घाटे में चल रहे PSE लगातार राजकोष पर बोझ डाल रहे हैं और अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं।

गैर-रणनीतिक PSE के लिए सुझाव

समिति ने सिफारिश की है कि गैर-रणनीतिक PSE को विनिवेश, निजीकरण या बंद करने पर विचार किया जा सकता है, यदि वे संभावित रूप से अव्यवहार्य हों। हालांकि, इस प्रक्रिया में कर्मचारियों की आजीविका की रक्षा करना अनिवार्य होगा। साथ ही, इन इकाइयों की भूमि और अन्य संपत्तियों का उत्पादक उपयोग सुनिश्चित करने की भी बात कही गई है।

सार्वजनिक उपयोगिताओं के लिए सिफारिशें

रिपोर्ट में कहा गया है कि आवश्यक सार्वजनिक उपयोगिताएं समाज के गरीब वर्गों के लिए सुलभ और किफायती रहनी चाहिए, लेकिन सामाजिक जिम्मेदारियों का उपयोग परिचालन अक्षमता या वित्तीय कुप्रबंधन को छिपाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। समिति ने उत्पादन-आधारित सब्सिडी से उपभोग-आधारित सब्सिडी की ओर बदलाव का सुझाव दिया है।

प्रभाव और आगे की राह

इन सिफारिशों का उद्देश्य केरल के सार्वजनिक उपक्रमों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना और राज्य के राजकोष पर बोझ कम करना है। हालांकि, इन सुधारों को लागू करने में कर्मचारियों के हितों की रक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसी चुनौतियां होंगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल के किन सार्वजनिक उपक्रमों को सबसे अधिक घाटा हो रहा है?

KSEB, KSRTC और KWA तीन प्रमुख उपक्रम हैं जो सबसे अधिक घाटे में हैं और इनका कुल घाटा सभी PSE के कुल घाटे का अधिकांश हिस्सा है।

बेवको और सप्लाईको के विलय से क्या लाभ होगा?

विलय से दोनों संगठनों के संसाधनों का समेकन होगा और परिचालन दक्षता बढ़ेगी, जिससे सरकार पर वित्तीय बोझ कम होगा।

गैर-रणनीतिक PSE के निजीकरण पर क्या शर्तें हैं?

निजीकरण या बंद करने की स्थिति में कर्मचारियों की आजीविका की रक्षा करना अनिवार्य है, साथ ही इन इकाइयों की भूमि और अन्य संपत्तियों का उत्पादक उपयोग सुनिश्चित करना होगा।

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