प्रमुख तथ्य
असम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गुवाहाटी के दो निजी स्कूलों के छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिन्होंने 64 छात्राओं और शिक्षिकाओं की डीपफेक तस्वीरें बनाकर सोशल मीडिया पर बेचीं। ये तस्वीरें 50 से 100 रुपये में टेलीग्राम ऐप पर बेची गईं।
पूरा मामला
असम पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त अंकुर जैन ने बताया कि क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर लिया है। उन्होंने कहा, "हमने प्रिंसिपलों, काउंसलरों और अश्लील सामग्री फैलाने में शामिल छात्रों के बयान दर्ज कर लिए हैं।" डीपफेक मामले का खुलासा करने वाले व्यक्ति को भी जांच में शामिल किया गया है।
स्कूल की कार्रवाई
12 जून 2026 को एक स्कूल ने आरोपी छात्रों को निलंबित कर दिया और मामला बाल दुर्व्यवहार निगरानी समिति को भेजा। स्कूल ने बयान जारी कर कहा कि साइबर दुर्व्यवहार, बदमाशी, डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग के प्रति उसकी जीरो-टॉलरेंस नीति है। स्कूल ने छात्रों और अभिभावकों से अप्रमाणित जानकारी न फैलाने की अपील की।
प्रभाव और सुझाव
यह घटना डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों को साइबर सुरक्षा शिक्षा अनिवार्य करनी चाहिए और अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गुवाहाटी डीपफेक मामले में कितनी छात्राओं और शिक्षिकाओं की तस्वीरें बनाई गईं?
इस मामले में 64 छात्राओं और शिक्षिकाओं की डीपफेक तस्वीरें बनाई गईं।
आरोपी छात्रों ने ये तस्वीरें कहां बेचीं?
आरोपी छात्रों ने टेलीग्राम ऐप पर ये तस्वीरें 50 से 100 रुपये में बेचीं।
स्कूल ने आरोपी छात्रों के खिलाफ क्या कार्रवाई की?
स्कूल ने आरोपी छात्रों को निलंबित कर दिया और मामला बाल दुर्व्यवहार निगरानी समिति को भेजा।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
असम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर प्रिंसिपलों, काउंसलरों और छात्रों के बयान दर्ज किए हैं।
स्रोत: www.thehindu.com