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बेंगलुरु के पास ai टाउनशिप के लिए दो लाख पेड़ काटे जाएंगे, किसानों ने जताया विरोध

मुख्य तथ्य बेंगलुरु के पास बिदादी में प्रस्तावित AI-संचालित टाउनशिप परियोजना के लिए नौ गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इसके तहत लगभग दो लाख पेड़ काटे जाने की योजना है। यह जानकारी एक RTI…

मुख्य तथ्य

बेंगलुरु के पास बिदादी में प्रस्तावित AI-संचालित टाउनशिप परियोजना के लिए नौ गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इसके तहत लगभग दो लाख पेड़ काटे जाने की योजना है। यह जानकारी एक RTI के जवाब से सामने आई है, जो फरवरी 2026 तक की स्थिति को दर्शाता है।

विस्तृत जानकारी

RTI डेटा के अनुसार, काटे जाने वाले पेड़ों में 83,536 सुपारी, 87,903 नारियल, 12,550 आम, 3,06,506 केले के पौधे, 2,344 चीकू, लगभग 2,500 गुलाब के पौधे, कई सीताफल के पेड़ और रेशम के खेत शामिल हैं। इसके अलावा, कटहल, रागी, धान, लाल चना, लोबिया, सेम, मक्का, मूंगफली और घोड़ा चने की फसलें भी नष्ट होंगी। सबसे अधिक प्रभाव रागी की खेती पर पड़ेगा, जो 231 एकड़ में फैली है।

किसानों का विरोध

विरोध कर रहे किसान नागराजु एम.आर. ने सरकार के इस दावे पर सवाल उठाया कि किसान घाटे में खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “जो किसान घाटा उठा रहे हैं, वे इतनी विविध फसलें कैसे उगा सकते हैं? ये आंकड़े बताते हैं कि किसान यहां फल-फूल रहे हैं।” नागराजु की मंडलहल्ली में 10 एकड़ से अधिक जमीन अधिग्रहण के लिए चिह्नित की गई है, फिर भी वे विरोध जारी रखे हुए हैं।

सरकार का पक्ष

ग्रेटर बेंगलुरु डेवलपमेंट अथॉरिटी (GBDA) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस क्षेत्र की फसलों को बाजार में अच्छी कीमत नहीं मिलती, क्योंकि बायरमंगला झील के प्रदूषण से फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने विरोध को राजनीतिक बताया। सरकार पेड़ों के लिए मुआवजा दे रही है: नारियल के लिए ₹25,000-₹40,000 और आम के लिए ₹45,000-₹65,000 प्रति पेड़। बागवानी विभाग पेड़ की उम्र, उपज क्षमता, मिट्टी की उर्वरता आदि के आधार पर मुआवजा तय करेगा।

पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव

कर्नाटक प्रांत रैत संघ (KPRS) के राज्य सचिव यशवंत टी. ने कहा कि बिदादी का हरित आवरण बेंगलुरु के मौसम पर सकारात्मक प्रभाव डालता है और यह एक आवश्यक हरित स्थान है जो खतरे में है। उन्होंने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि वे राहुल गांधी का समर्थन करते हैं, जो देश के अन्य हिस्सों में पर्यावरण-विनाशकारी परियोजनाओं के खिलाफ अभियान चला रहे हैं, लेकिन कर्नाटक में वे ऐसी ही परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि परियोजना का सामाजिक प्रभाव आकलन नहीं किया गया, जिससे उनकी आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।

FAQ

बिदादी AI टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए कितने पेड़ काटे जाएंगे?

लगभग दो लाख पेड़ काटे जाएंगे, जिनमें 83,536 सुपारी, 87,903 नारियल, 12,550 आम और 3,06,506 केले के पौधे शामिल हैं।

किसान इस प्रोजेक्ट का विरोध क्यों कर रहे हैं?

किसानों का कहना है कि इससे उनकी खेती और आजीविका खत्म हो जाएगी, साथ ही पर्यावरण को भी भारी नुकसान होगा। वे सरकार पर सामाजिक प्रभाव आकलन न करने का आरोप लगा रहे हैं।

सरकार पेड़ों के लिए कितना मुआवजा दे रही है?

नारियल के पेड़ के लिए न्यूनतम ₹25,000 और अधिकतम ₹40,000, जबकि आम के पेड़ के लिए न्यूनतम ₹45,000 और अधिकतम ₹65,000 मुआवजा तय किया गया है।

प्रोजेक्ट का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

बिदादी का हरित आवरण बेंगलुरु के मौसम पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसके नष्ट होने से शहर की जलवायु और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

स्रोत: www.thehindu.com

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