मैंगो फेस्टिवल: किसानों को मिले नए ग्राहक
चेन्नई के एक मॉल में आयोजित माम्बाझा मेला (मैंगो फेस्टिवल) किसानों के लिए एक मीठा सौदा साबित हुआ। तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के किसानों ने इसमें भाग लिया और न केवल अपने सारे आम बेचे, बल्कि नए ग्राहक भी प्राप्त किए।
नाबकिसान की पहल
यह आयोजन नाबार्ड की सहायक कंपनी नाबकिसान द्वारा किया गया था। इस मेले में 16 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को एक साथ लाया गया, जो आम का उत्पादन और प्रसंस्करण करते हैं।
किसानों की प्रतिक्रिया
सेलम के पेथानाइकनपलायम से दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाले किसान एस. जयरामन ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा, "मुझे करुमंदुरई (एक पहाड़ी स्टेशन) से सेलम गुंडू, बंगलूरा, मालगोवा और इमामपसंद जैसी किस्मों के आम मिले। जिन लोगों ने फल चखा, उन्होंने वापस फोन कर कहा कि वे भूल गए थे कि आम कितने अच्छे लगते हैं।" उन्होंने कहा कि ऐसे बाजार अन्य उत्पादों जैसे बाजरा और सब्जियों के लिए भी आयोजित किए जाने चाहिए।
थेनी के चिन्नामन्नूर से डीडब्ल्यूसी ट्रस्ट की एम. पारमेश्वरी ने बताया कि उनके मूल्य वर्धित उत्पाद, जिनमें आम का अचार और नमक में आम शामिल हैं, अच्छे बिके। उन्होंने कहा, "हमारे क्षेत्र में किसी के पास फ्रीजर वैन नहीं है, इसलिए हमें आम बस से लाने पड़े। परिवहन के दौरान कुछ आम खराब हो गए क्योंकि बोरियां नीचे रखी गई थीं।"
सफल पायलट प्रोग्राम
नाबकिसान के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहन कार्तिक ने कहा कि मेले में लाए गए सभी आम बिक गए। उन्होंने कहा, "किसान अपने उत्पाद के लिए नए ग्राहक प्राप्त करने में सक्षम रहे। यह एक पायलट प्रोग्राम था। हम किसानों से फीडबैक लेंगे।"
क्या है नाबकिसान?
नाबकिसान नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) की एक सहायक कंपनी है, जो किसान उत्पादक संगठनों को बाजार से जोड़ने का काम करती है।
निष्कर्ष
यह मैंगो फेस्टिवल किसानों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संवाद स्थापित करने में सफल रहा। किसानों को नए ग्राहक मिले और उनके उत्पाद की बिक्री सुनिश्चित हुई। इस तरह के आयोजन कृषि क्षेत्र को मजबूत करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- मैंगो फेस्टिवल का आयोजन किसने किया? इस फेस्टिवल का आयोजन नाबार्ड की सहायक कंपनी नाबकिसान ने किया।
- फेस्टिवल में कितने किसान उत्पादक संगठनों ने भाग लिया? फेस्टिवल में 16 किसान उत्पादक संगठनों ने भाग लिया।
- किसानों को फेस्टिवल से क्या लाभ हुआ? किसानों को नए ग्राहक मिले और वे अपने सारे आम बेचने में सफल रहे।
स्रोत: www.thehindu.com