मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार 22 जून 2026 से शुरू होने वाले मानसून सत्र में महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक 2026 पेश करेगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार (12 जून 2026) को यह घोषणा की। इस विधेयक का उद्देश्य महिला किसानों को स्वतंत्र कानूनी मान्यता देना और उनकी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच में सुधार करना है।
विधेयक का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी 81% से अधिक है, लेकिन अधिकांश कृषि नीतियां और सरकारी योजनाएं पुरुष-केंद्रित हैं। भूमि स्वामित्व को अक्सर लाभ प्राप्त करने की शर्त बना दिया जाता है, जिससे बड़ी संख्या में महिला किसान वंचित रह जाती हैं। परिवार या सामुदायिक भूमि पर खेती करने वाली महिलाएं और मत्स्य पालन, पशुपालन, मुर्गी पालन तथा वनोपज संग्रह जैसी सहायक गतिविधियों में लगी महिलाओं को किसान के रूप में मान्यता नहीं मिलती। इसी पृष्ठभूमि में यह विधेयक तैयार किया गया है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
- महिला किसानों को स्वतंत्र कानूनी मान्यता प्रदान करना।
- सरकारी ऋण योजनाओं, कृषि सब्सिडी, बीज, उर्वरक, फसल बीमा, विस्तार सेवाओं, बाजार सुविधाओं, परिवहन, भंडारण बुनियादी ढांचे और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना।
- एक डिजिटल प्रणाली विकसित करना जिससे महिला किसान इन योजनाओं का लाभ उठा सकें।
महिला किसानों पर प्रभाव
इस विधेयक से महिला किसानों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आने वाली बाधाएं दूर होंगी और वे कृषि क्षेत्र में समान भागीदार बन सकेंगी।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
यह विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। इसके पारित होने के बाद महिला किसानों को कानूनी मान्यता मिलेगी और वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक 2026 क्या है?
यह विधेयक महिला किसानों को स्वतंत्र कानूनी मान्यता प्रदान करेगा, जिससे वे सरकारी योजनाओं और संस्थागत सहायता का लाभ उठा सकेंगी।
यह विधेयक कब पेश किया जाएगा?
यह विधेयक 22 जून 2026 से शुरू होने वाले मानसून सत्र में महाराष्ट्र विधानसभा में पेश किया जाएगा।
महाराष्ट्र में कृषि में महिलाओं की भागीदारी कितनी है?
महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी 81% से अधिक है।
स्रोत: www.thehindu.com