मुख्य तथ्य
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हालिया विद्रोह के पीछे एक चौंकाने वाला नाम सामने आया है: आंध्र प्रदेश से BJP सांसद CM Ramesh। 61 वर्षीय इस नेता पर आरोप है कि वह TMC सांसदों को BJP में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव इस ऑपरेशन के औपचारिक प्रभारी हैं, लेकिन अधिकांश कॉल CM Ramesh ने ही किए हैं।
विस्तृत जानकारी
CM Ramesh ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, “मेरी क्षमता लोगों को समझाने की है। मुझे बस कुछ घंटे चाहिए और मैं किसी को भी BJP में शामिल होने के लिए मना सकता हूं।” उन्होंने कहा कि वह कई TMC सांसदों को लंबे समय से जानते हैं और संसद में कैंटीन और अन्य जगहों पर मुलाकातों से संबंध बने हैं। 2020 में उनके बेटे की शादी में दुबई और हैदराबाद में हुए समारोहों में कई दलों के नेता शामिल हुए थे, जिनमें तत्कालीन ममता बनर्जी की वफादार शताब्दी रॉय भी थीं, जो अब विद्रोही खेमे में हैं।
ममता बनर्जी के समर्थकों का आरोप है कि 22 TMC सांसदों (19 लोकसभा और 3 राज्यसभा) को दो वादों के साथ लुभाया गया: पहला, केंद्र सरकार उनके संसदीय क्षेत्रों का ध्यान रखेगी; दूसरा, उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED), स्थानीय पुलिस और CID से परेशान नहीं किया जाएगा। हालांकि, CM Ramesh ने पैसे या पद के ऑफर से इनकार किया।
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने CM Ramesh को विद्रोह का मुख्य कारण नहीं माना। उन्होंने कहा, “CM Ramesh मेरे दोस्त हैं, मैं उनसे प्यार करती हूं। वह राजनीतिक रूप से प्रासंगिक रहना चाहते हैं। कुछ लोग जमीनी स्तर पर प्रासंगिक होते हैं, कुछ नेटवर्क से। CM Ramesh हमेशा प्रासंगिक रहना चाहते हैं और BJP को अपनी प्रासंगिकता साबित करना चाहते हैं। यह ऐसा है जैसे कोई केक बन रहा हो और वह उसमें एक किशमिश डालना चाहते हों।”
गौरतलब है कि CM Ramesh ने 2019 में भी ऐसा ही किया था। जब चंद्रबाबू नायडू की सरकार गिरी, तो उन्होंने TDP के चार सांसदों को BJP में शामिल कराया। तब भी नायडू ने दलबदल विरोधी कानून का सहारा नहीं लिया, और बाद में वे BJP के सहयोगी बन गए।
हाल ही में, CM Ramesh कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के चुनाव में भी शामिल हुए, जहां राजीव प्रताप रूडी और संजीव बालियान के बीच मुकाबला था। वहां उन्होंने झारखंड के BJP सांसद निशिकांत दुबे के साथ टीम बनाई, जो TMC ऑपरेशन में भी शामिल बताए जाते हैं। एक TMC राज्यसभा सांसद ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हम जानते हैं कि CM Ramesh उस समय तीन TMC सांसदों के संपर्क में थे।”
हालांकि, यह मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ही थे जिन्होंने अनिच्छुक सांसदों जैसे सायोनी घोष को राजी किया। कई सांसदों ने सहमति से पहले अधिकारी से व्यक्तिगत मुलाकात पर जोर दिया। यह बैठक 8 जून को शताब्दी रॉय के घर पर हुई, उसी दिन जब INDIA गठबंधन के सहयोगी दल दिल्ली में मिले थे।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। TMC में विद्रोह से ममता बनर्जी की सरकार को खतरा हो सकता है, और BJP को पूर्वी भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका मिल सकता है। CM Ramesh जैसे नेताओं की भूमिका दर्शाती है कि कैसे अंतर-राज्यीय संबंध और व्यक्तिगत नेटवर्क राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- CM Ramesh कौन हैं? CM Ramesh आंध्र प्रदेश से BJP सांसद हैं, जो पहले TDP में थे और अब TMC सांसदों को BJP में शामिल करने की कोशिशों में शामिल हैं।
- TMC सांसदों को तोड़ने में क्या लालच दिया गया? आरोप है कि केंद्र सरकार से संसदीय क्षेत्रों के विकास और जांच एजेंसियों से सुरक्षा का वादा किया गया, लेकिन CM Ramesh ने पैसे या पद का ऑफर देने से इनकार किया।
- क्या CM Ramesh ने पहले भी ऐसा किया है? हां, 2019 में जब चंद्रबाबू नायडू की सरकार गिरी, तब उन्होंने TDP के चार सांसदों को BJP में शामिल कराया था।
स्रोत: www.hindustantimes.com