मुख्य तथ्य
जम्मू-कश्मीर पुलिस की विशेष शाखा काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) ने शुक्रवार (12 जून 2026) को एक विशेष अदालत द्वारा जारी प्रोक्लेमेशन आदेशों को लागू किया। ये आदेश यूनाइटेड जिहाद काउंसिल (UJC) प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन, हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर गुलाम नबी खान उर्फ अमीर खान और दो अन्य के खिलाफ 1996 में दर्ज एक मामले में जारी किए गए।
विस्तृत जानकारी
पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान आरोपी गिरफ्तारी से बचते रहे और जानबूझकर कानूनी कार्यवाही से दूर रहे। इसके परिणामस्वरूप, अदालत ने प्रोक्लेमेशन कार्यवाही शुरू की, जिसमें उन्हें 14 जुलाई 2026 को सुबह 10 बजे अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया। ऐसा न करने पर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रोक्लेमेशन आदेश श्रीनगर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश TADA/POTA (NIA अधिनियम के तहत विशेष न्यायाधीश) द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 84 के तहत जारी किए गए। यह मामला पुलिस स्टेशन CIK में दर्ज है।
अन्य आरोपी
सलाहुद्दीन और खान के अलावा, दो अन्य आरोपियों की पहचान शेर मोहम्मद उर्फ बहादुर उर्फ रियाज (निवासी बांदीपोरा) और नासिर यूसुफ कादरी (निवासी श्रीनगर) के रूप में हुई है।
प्रभाव और महत्व
CIK टीमों ने प्रोक्लेमेशन आदेश जारी किए और आरोपियों के आवासों और मुख्य द्वारों सहित प्रमुख स्थानों पर प्रतियां चस्पा कीं। पुलिस ने कहा कि यह कार्य कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार किया गया और इसकी तस्वीरें और वीडियो लिए गए।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
यह मामला 1996 से लंबित है और इसमें आरोपी लंबे समय से कानून से बच रहे थे। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि वे 14 जुलाई 2026 को पेश नहीं होते, तो उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रोक्लेमेशन आदेश किस मामले में जारी किए गए?
ये आदेश 1996 में दर्ज एक मामले में जारी किए गए हैं, जिसमें सैयद सलाहुद्दीन और तीन अन्य पर आरोप हैं।
आरोपियों को अदालत में कब पेश होने का निर्देश दिया गया?
अदालत ने आरोपियों को 14 जुलाई 2026 को सुबह 10 बजे पेश होने का निर्देश दिया है।
प्रोक्लेमेशन आदेश किस कानून के तहत जारी किए गए?
ये आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 84 के तहत जारी किए गए।
स्रोत: www.thehindu.com