मुख्य तथ्य
NLC India Limited (NLCIL) ने CSIR-Central Electrochemical Research Institute (CSIR-CECRI), Karaikudi के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया है। इसका उद्देश्य क्रिटिकल और सामरिक खनिजों के लाभकारीकरण और निष्कर्षण प्रौद्योगिकियों में सहयोग को बढ़ावा देना है।
समझौते का विवरण
यह MoU NLCIL के कार्यकारी निदेशक (खान और भूमि) I.S. Jasper Rose और CSIR-CECRI के निदेशक K. Ramesha द्वारा हस्ताक्षरित किया गया। इस अवसर पर NLCIL के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक Prasanna Kumar Motupalli तथा अन्य कार्यकारी निदेशक भी उपस्थित थे।
समझौते के तहत, Neyveli में NLCIL की खानों से उत्पन्न ओवरबर्डन सामग्री और टेलिंग्स पर विस्तृत अध्ययन किया जाएगा, ताकि दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (REEs) और अन्य ट्रेस तत्वों के निष्कर्षण और वसूली की संभावना का आकलन किया जा सके। इसके अलावा, NLCIL की अन्य खनन और अन्वेषण परियोजनाओं में भी इसी तरह के अवसरों की खोज की जाएगी।
प्रभाव और महत्व
यह साझेदारी द्वितीयक स्रोतों से संसाधन वसूली के लिए टिकाऊ और आर्थिक रूप से व्यवहार्य प्रौद्योगिकियों के विकास पर केंद्रित है। श्री Motupalli ने कहा कि यह साझेदारी नवीन प्रौद्योगिकियों के विकास को सुविधाजनक बनाएगी, राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन के उद्देश्यों में योगदान देगी, और प्रधानमंत्री के 2047 के विजन के अनुरूप होगी। इससे भारत की क्रिटिकल खनिजों में आत्मनिर्भरता मजबूत होगी और एक सुरक्षित एवं टिकाऊ ऊर्जा भविष्य सुनिश्चित होगा।
श्री Ramesha ने कहा, “यह रणनीतिक साझेदारी क्रिटिकल और सामरिक खनिजों के क्षेत्र में सार्थक शोध परिणाम और तकनीकी प्रगति लाएगी, जिससे संसाधन सुरक्षा और क्रिटिकल खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में आत्मनिर्भरता के भारत के प्रयासों को समर्थन मिलेगा।”
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
- यह MoU भारत के क्रिटिकल मिनरल सेक्टर में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अधिक आत्मनिर्भर बनाएगा।
- दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में होता है, जिससे यह साझेदारी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
- यह पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों के विकास को बढ़ावा देगा, जिससे खनन अपशिष्ट का पुन: उपयोग हो सकेगा।
FAQ
NLC India और CSIR-CECRI के बीच MoU का उद्देश्य क्या है?
इस समझौते का उद्देश्य क्रिटिकल और सामरिक खनिजों के लाभकारीकरण और निष्कर्षण प्रौद्योगिकियों में सहयोग करना है, विशेष रूप से NLCIL की खानों से उत्पन्न ओवरबर्डन सामग्री और टेलिंग्स से दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की वसूली के लिए।
इस साझेदारी से क्या लाभ होने की उम्मीद है?
इससे नवीन और टिकाऊ प्रौद्योगिकियों का विकास होगा, राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन को बल मिलेगा, और भारत की क्रिटिकल खनिजों में आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।
यह समझौता किन क्षेत्रों में काम करेगा?
यह Neyveli की खानों से ओवरबर्डन और टेलिंग्स के अध्ययन के साथ-साथ NLCIL की अन्य खनन परियोजनाओं में भी दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और अन्य ट्रेस तत्वों की वसूली की संभावनाएं तलाशेगा।