मुख्य तथ्य
तमिलनाडु में सौर ऊर्जा उत्पादकों ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कुछ प्रमुख नीतिगत मुद्दों में बदलाव की मांग की है। नेटवर्किंग शुल्क, डीम्ड डिमांड चार्ज और सौर पैनल स्थापना की अनुमति प्रक्रिया जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
विस्तार से जानकारी
कुछ परियोजनाएं, जिन्हें कुछ महीने पहले मंजूरी दी गई थी और जो लगभग स्थापना के लिए तैयार थीं, को रोक दिया गया। इसके बाद निवेशकों ने अदालत का रुख किया और आदेश पर रोक लगवा ली। अब मामले को संबंधित मंत्री के पास उठाया गया है और परियोजनाओं की समीक्षा केस-टू-केस आधार पर की जा रही है।
एक सौर ऊर्जा परियोजना भूमि अधिग्रहण से लेकर कमीशनिंग तक सात चरणों से गुजरती है और इसमें लगभग तीन महीने लगते हैं। निवेशकों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाया जाना चाहिए। रूफटॉप सौर ऊर्जा उत्पादकों के लिए नेटवर्किंग शुल्क एक बड़ी बाधा है, जिसे हटाया जाना चाहिए।
प्रभाव और आगे की राह
डीम्ड डिमांड चार्ज के मुद्दे पर निवेशकों ने कहा कि यह लंबे समय से लंबित है और इसे सुप्रीम कोर्ट और एपेलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी में ले जाया गया है। राज्य सरकार को नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के निवेशकों को राहत देनी चाहिए, जिससे अधिक कंपनियां निवेश करने को प्रोत्साहित होंगी।
सरकार को हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को भी बढ़ावा देना चाहिए, जिससे निवेशकों को भूमि निवेश और अनुमति लागत बचाने में मदद मिलेगी।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- सौर ऊर्जा निवेशक नेटवर्किंग शुल्क हटाने की मांग कर रहे हैं।
- डीम्ड डिमांड चार्ज को लेकर कानूनी लड़ाई जारी है।
- हाइब्रिड परियोजनाओं से लागत बचत संभव है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सौर ऊर्जा निवेशकों की मुख्य मांगें क्या हैं?
नेटवर्किंग शुल्क हटाना, डीम्ड डिमांड चार्ज में राहत, और परियोजना अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाना।
डीम्ड डिमांड चार्ज क्या है?
यह एक विवादित शुल्क है जो सौर ऊर्जा उत्पादकों से लिया जाता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट और एपेलेट ट्रिब्यूनल में चुनौती दी गई है।
हाइब्रिड परियोजनाओं से क्या लाभ है?
इससे भूमि निवेश और अनुमति लागत बचती है, जिससे निवेशकों को प्रोत्साहन मिलता है।
स्रोत: www.thehindu.com