मुख्य तथ्य
केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने गुरुवार को हैदराबाद में आयोजित एक रोडशो में कहा कि भारत का सरफेस कोल गैसीकरण कार्यक्रम निवेशकों के लिए बड़ा व्यावसायिक और राष्ट्र निर्माण का अवसर है। केंद्रीय कैबिनेट ने हाल ही में इस कार्यक्रम के लिए ₹37,500 करोड़ की वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है।
विस्तार से जानकारी
कोयला मंत्रालय द्वारा आयोजित इस रोडशो में मंत्री रेड्डी ने अर्थव्यवस्था को शक्ति प्रदान करने में कोयले की निरंतर भूमिका पर जोर दिया। कैबिनेट ने भूमिगत और सतही कोयला गैसीकरण कार्यक्रमों के लिए कुल ₹46,000 करोड़ के प्रोत्साहन को मंजूरी दी है, जिससे ₹4 लाख करोड़ के निवेश और लाखों रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
सरफेस कोल गैसीकरण कार्यक्रम के लिए ड्राफ्ट रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) को सार्वजनिक टिप्पणियों और सुझावों के लिए जारी कर दिया गया है। मंत्री रेड्डी ने हितधारकों से आत्मविश्वास के साथ इस कार्यक्रम में भाग लेने का आग्रह किया।
लक्ष्य और प्रभाव
भारत का कोयला या लिग्नाइट गैसीकरण कार्यक्रम 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य रखता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे प्रमुख उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी।
कोयला गैसीकरण भारत के विनिर्माण क्षेत्र, विशेष रूप से ऊर्जा, उर्वरक और स्टील के भविष्य से निकटता से जुड़ा हुआ है। मंत्री रेड्डी ने कहा कि भारत एक दशक में बड़े पैमाने पर कोयला गैसीकरण में प्रवेश करने के लिए तैयार है।
कोयला भंडार और उपयोग
लगभग 400 बिलियन टन कोयला भंडार के साथ भारत दुनिया में पांचवां सबसे बड़ा है और कई दशकों तक पर्याप्त उपलब्धता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक और उपभोक्ता है, जहां लगभग 70% बिजली उत्पादन कोयले पर निर्भर है और लाखों लोगों की आजीविका इस क्षेत्र से जुड़ी है।
मंत्री रेड्डी ने संसाधन के स्मार्ट उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि कोयला गैसीकरण घरेलू कोयले को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयात निर्भरता कम करने और आर्थिक लचीलापन बढ़ाने का रणनीतिक मार्ग प्रदान करता है।
अन्य अधिकारियों के वक्तव्य
कोयला और खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने आत्मनिर्भर और विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में कोयला गैसीकरण के सामरिक महत्व पर प्रकाश डाला।
कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों ने लचीली घरेलू आपूर्ति श्रृंखला बनाने और आयात पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने योजना को मंजूरी दे दी है और केंद्रीय सहायता, राज्य प्रोत्साहन, सुनिश्चित कोयला लिंकेज और डाउनस्ट्रीम बुनियादी ढांचा मिलकर एक आकर्षक निवेश पारिस्थितिकी तंत्र बनाते हैं।
FAQ
सरफेस कोल गैसीकरण कार्यक्रम क्या है?
यह एक सरकारी योजना है जिसमें कोयले को गैस में बदलकर ऊर्जा, उर्वरक और स्टील जैसे क्षेत्रों में उपयोग किया जाता है। इसके लिए केंद्रीय कैबिनेट ने ₹37,500 करोड़ की वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है।
इस कार्यक्रम से कितना निवेश आने की उम्मीद है?
सरकार को उम्मीद है कि इस कार्यक्रम से ₹4 लाख करोड़ का निवेश आएगा और लाखों रोजगार सृजित होंगे।
कोयला गैसीकरण का लक्ष्य क्या है?
2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य रखा गया है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी।
भारत के पास कितने कोयला भंडार हैं?
भारत के पास लगभग 400 बिलियन टन कोयला भंडार हैं, जो दुनिया में पांचवां सबसे बड़ा है। देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक और उपभोक्ता है।