मुख्य जानकारी
कुल्लू जिले में बच्चों को तनावमुक्त रखने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। यह चार दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में आयोजित की गई, जिसका समापन शनिवार, 11 जुलाई 2026 को हुआ। कार्यशाला का आयोजन डाइट और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहयोग से आयुष्मान भारत-स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस प्रोग्राम के तहत किया गया।
प्रशिक्षण का विवरण
कार्यशाला में मुख्य वक्ताओं के रूप में नारायण ठाकुर, विपना वर्मा, निर्मला शर्मा, मीना वर्मा, रोहित मेहता, श्वेता अवस्थी और अच्छर सिंह ने शिक्षकों को विभिन्न जीवन कौशलों का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण में शामिल विषयों में शामिल हैं:
- आपसी संबंध और लैंगिक समानता
- स्वास्थ्य और पोषण
- नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम
- प्रजनन स्वास्थ्य और एचआईवी एड्स की रोकथाम
- हिंसा से सुरक्षा
- इंटरनेट, गैजेट्स और सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग
कार्यशाला का उद्देश्य और प्रभाव
कार्यशाला की मुख्य अतिथि डाइट की उपप्रधानाचार्य पार्वती देवी ने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों की मानसिक और शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से उनकी कमजोरियों की पहचान करना सिखाना था। समय पर पहचान कर कमियों का निदान कर बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। कार्यशाला के समन्वयक जितेंद्र शर्मा ने बताया कि इसमें सरकारी विद्यालयों के हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर के रूप में नियुक्त 51 शिक्षकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
यह प्रशिक्षण बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक अब बच्चों की समस्याओं को जल्द पहचान कर उचित मार्गदर्शन दे सकेंगे। इससे स्कूलों में बच्चों का तनाव स्तर कम होने और उनके शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार होने की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
यह प्रशिक्षण कहां आयोजित किया गया?
यह प्रशिक्षण कुल्लू जिले के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण में कितने शिक्षकों ने भाग लिया?
प्रशिक्षण में सरकारी विद्यालयों के हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर के रूप में नियुक्त 51 शिक्षकों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या था?
प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों की मानसिक और शारीरिक गतिविधियों से उनकी कमजोरियों की पहचान करना और समय पर निदान कर बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना था।
प्रशिक्षण में किन विषयों पर जानकारी दी गई?
प्रशिक्षण में आपसी संबंध, लैंगिक समानता, स्वास्थ्य, पोषण, नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम, प्रजनन स्वास्थ्य, एचआईवी एड्स की रोकथाम, हिंसा से सुरक्षा, और इंटरनेट, गैजेट्स व सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग पर जानकारी दी गई।