मुख्य मांग
पीएमके (पट्टाली मक्कल काची) के अध्यक्ष अनबुमणि रामदोस ने शनिवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मांग की कि वन्नियार आरक्षण आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी दी जाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार ने करूर स्टैम्पेड पीड़ितों के परिवारों को नौकरी देने का फैसला किया है, उसी तरह अन्य पीड़ितों को भी राहत मिलनी चाहिए।
पृष्ठभूमि
वन्नियार आरक्षण आंदोलन 17 सितंबर 1987 को शुरू हुआ था और एक सप्ताह तक चला था। इस दौरान वन्नियार समुदाय के लोगों ने सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन किया था। पुलिस की कार्रवाई में 21 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कुल 25 लोग विभिन्न कारणों से मारे गए थे।
रामदोस का बयान
अनबुमणि रामदोस ने एक बयान में कहा, 'जिन परिवारों के सदस्य आरक्षण आंदोलन के दौरान गोलीबारी में मारे गए, उन्हें सरकारी नौकरी और अन्य सहायता पाने का पूरा अधिकार है। सरकार का कर्तव्य और जिम्मेदारी है कि वह उन्हें यह सहायता प्रदान करे।' उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा करूर स्टैम्पेड पीड़ितों के प्रति दिखाई गई संवेदनशीलता का स्वागत है, लेकिन यह राहत केवल एक समूह तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
प्रभाव और आगे की राह
इस मांग से तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है। वन्नियार समुदाय राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और इस मुद्दे पर सरकार के फैसले का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। रामदोस की मांग से यह स्पष्ट है कि पीएमके सरकार से सभी पीड़ितों के लिए समान व्यवहार की उम्मीद करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
PMK नेता अनबुमणि रामदोस ने क्या मांग की है?
उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से वन्नियार आरक्षण आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
यह आंदोलन कब हुआ था?
यह आंदोलन 17 सितंबर 1987 से शुरू हुआ एक सप्ताह तक चला था।
इस आंदोलन में कितने लोग मारे गए थे?
पुलिस फायरिंग में 21 लोग मारे गए थे, और कुल 25 लोगों की मौत हुई थी।
मुख्यमंत्री ने करूर स्टैम्पेड पीड़ितों के परिवारों को क्या दिया था?
मुख्यमंत्री ने करूर स्टैम्पेड में मारे गए लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी।