मुख्य तथ्य
केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को तीन CBSE छात्रों, जिनमें एक UAE से है, को KEAM रैंक सूची में पुनर्मूल्यांकित अंक अपलोड करने की अनुमति दी। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उनका प्रवेश दूसरे आवंटन से ही मान्य होगा।
विस्तार से जानकारी
छात्रों ने याचिका दायर कर कहा था कि यदि उनके पुनर्मूल्यांकित अंकों को शामिल किया जाता, तो उनकी रैंक में काफी सुधार होता। उन्होंने आरोप लगाया कि CBSE की मूल्यांकन प्रक्रिया में अनियमितताओं और पुनर्मूल्यांकन परिणामों में देरी के कारण वे KEAM 2026 में अपनी योग्य रैंक से वंचित रह गए।
राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि CBSE छात्रों को समायोजित करने के लिए रैंक सूची प्रकाशन की तारीख दो बार बदली जा चुकी है, और पुनर्मूल्यांकित अंक अपलोड करने की अंतिम तिथि 23 जून थी। सरकार ने तर्क दिया कि अंतिम रैंक सूची 27 जून को प्रकाशित हो चुकी है और इसे किसी भी व्यक्ति के लिए पुनर्विचार नहीं किया जाना चाहिए।
प्रभाव और निर्णय
हाईकोर्ट ने सरकार के तर्कों से असहमति जताते हुए कहा कि यह मामला 'निस्संदेह असाधारण' है और 'असाधारण परिस्थितियों में असाधारण उपायों की आवश्यकता होती है'। कोर्ट ने कहा कि CBSE की मूल्यांकन प्रक्रिया में कई तकनीकी खामियां थीं, जैसे उत्तर पुस्तिकाओं का आदान-प्रदान, धुंधली स्कैन की गई पृष्ठ आदि, जो छात्रों की गलती नहीं थी।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अधिकांश पुनर्मूल्यांकन समय पर हुए, लेकिन याचिकाकर्ता उस श्रेणी में आते हैं जिनके पुनर्मूल्यांकित परिणाम रैंक सूची प्रकाशन के बाद आए। कोर्ट ने कहा, 'उन्होंने बिना किसी देरी के इस अदालत का दरवाजा खटखटाया है। प्रवेश प्रक्रिया श्रमसाध्य है, लेकिन यह मेरिट से समझौता करने का आधार नहीं हो सकता।'
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- कोर्ट ने प्रवेश आयुक्त को निर्देश दिया कि वे 13 जुलाई को दोपहर 12:30 बजे तक पुनर्मूल्यांकित अंक स्वीकार करें और दूसरे आवंटन से पहले रैंक सूची को संशोधित करें।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी अन्य व्यक्ति के पुनर्मूल्यांकित अंक अपलोड नहीं किए जाएंगे।
- याचिकाकर्ताओं का प्रवेश केवल दूसरे आवंटन से मान्य होगा, पहले आवंटन में उन्हें कोई लाभ नहीं मिलेगा।
FAQ
केरल हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?
कोर्ट ने तीन छात्रों को KEAM रैंक सूची में पुनर्मूल्यांकित अंक अपलोड करने की अनुमति दी, लेकिन प्रवेश दूसरे आवंटन से होगा।
छात्रों ने कोर्ट में क्या तर्क दिया?
छात्रों ने कहा कि CBSE की मूल्यांकन त्रुटियों और पुनर्मूल्यांकन में देरी के कारण उनकी रैंक खराब हुई।
सरकार ने याचिका का विरोध क्यों किया?
सरकार ने कहा कि रैंक सूची में बदलाव से प्रवेश प्रक्रिया बाधित होगी।
कोर्ट ने किन परिस्थितियों को असाधारण माना?
कोर्ट ने CBSE की मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी खामियों और छात्रों की बिना देरी के कोर्ट आने को असाधारण माना।