प्रमुख तथ्य
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई स्वीकार कर ली, जिनमें खाड़ी देशों में कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाएं रद्द होने के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की मूल्यांकन योजना को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र और CBSE को नोटिस जारी कर 14 जुलाई को सुनवाई तय की है।
याचिका का विवरण
30 नियमित छात्रों ने 27 मार्च, 2026 की मूल्यांकन नीति को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। उनका कहना है कि यह योजना अनुचित और भेदभावपूर्ण है। याचिकाकर्ताओं ने CBSE को पारदर्शी और न्यायसंगत मूल्यांकन तंत्र अपनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। साथ ही, उन्होंने सभी प्रभावित छात्रों के लिए विशेष परीक्षा और सुधार परीक्षा आयोजित करने की मांग की है, जिसमें वे किसी भी संख्या में विषयों में शामिल हो सकें और अधिक अनुकूल परिणाम रख सकें।
एक अन्य याचिका एक निजी परीक्षार्थी ने दायर की है, जिसमें 21 जून की मूल्यांकन नीति को चुनौती दी गई है। यह नीति उन निजी परीक्षार्थियों के लिए बनाई गई थी, जिनके पास स्कूल-आधारित आंतरिक मूल्यांकन रिकॉर्ड नहीं थे।
मूल्यांकन योजना का विवरण
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि खाड़ी देशों में परीक्षा रद्द होने से दो समूह प्रभावित हुए: नियमित छात्र और निजी परीक्षार्थी। नियमित छात्रों का मूल्यांकन स्कूल रिकॉर्ड (प्री-बोर्ड और आंतरिक परीक्षा अंक) के आधार पर किया जा सकता है, जबकि निजी परीक्षार्थियों के पास ऐसे रिकॉर्ड नहीं हैं। इसलिए 21 जून की नीति में एक भारित फॉर्मूला अपनाया गया: कक्षा 10 के सिद्धांत अंकों का 40% और अंतिम कक्षा 12 परीक्षा में प्राप्त सिद्धांत अंकों का 60%।
प्रभावित देश
CBSE ने बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में कक्षा 12 की परीक्षाएं ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण रद्द कर दी थीं।
अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को तय की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता राज किशोर चौधरी और विनीत जिंदल ने पेश किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- सुप्रीम कोर्ट में किस याचिका पर सुनवाई हुई? सुप्रीम कोर्ट ने खाड़ी देशों में CBSE कक्षा 12 की परीक्षा रद्द होने के बाद बोर्ड की मूल्यांकन योजना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्वीकार की।
- याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग क्या है? याचिकाकर्ताओं ने मूल्यांकन योजना को अनुचित और भेदभावपूर्ण बताते हुए इसे रद्द करने या संशोधित करने की मांग की है। उन्होंने विशेष परीक्षा और सुधार परीक्षा आयोजित करने का भी अनुरोध किया है।
- CBSE ने खाड़ी देशों में परीक्षा क्यों रद्द की? ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में CBSE ने कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी थीं।
- निजी परीक्षार्थियों के लिए अलग मूल्यांकन नीति क्यों बनाई गई? निजी परीक्षार्थियों के पास स्कूल-आधारित आंतरिक मूल्यांकन रिकॉर्ड नहीं थे, इसलिए उनके लिए 21 जून को अलग नीति बनाई गई, जिसमें 40% कक्षा 10 और 60% अंतिम कक्षा 12 के अंकों के आधार पर मूल्यांकन किया गया।