Desh Duniya | Md. Shakeel Akhter

Rti आवेदनों में देरी पर तमिलनाडु सूचना आयोग ने जताई चिंता, ऑनलाइन प्रबंधन की सिफारिश

मुख्य तथ्य तमिलनाडु सूचना आयोग (Tamil Nadu Information Commission) ने सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत दायर आवेदनों के निपटान में हो रही भारी देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आयोग ने…

मुख्य तथ्य

तमिलनाडु सूचना आयोग (Tamil Nadu Information Commission) ने सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत दायर आवेदनों के निपटान में हो रही भारी देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आयोग ने राज्य सरकार से सभी सचिवालय विभागों, विभागाध्यक्षों (Heads of Departments) और जिला कलेक्ट्रेटों (District Collectorates) में RTI आवेदनों और प्रतिक्रियाओं के ऑनलाइन प्रबंधन की सुविधा प्रदान करने का आग्रह किया है।

विस्तार से जानकारी

तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) मोहम्मद शकील अख्तर (Md. Shakeel Akhter) ने मुख्य सचिव को लिखे एक पत्र में कहा कि सचिवालय विभागों और कुछ जिला कलेक्ट्रेटों में RTI आवेदन दाखिल करने की ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू तो हो गई है, लेकिन यह प्रभावी नहीं है। इस प्रक्रिया में काफी भ्रम है, जिसके कारण सार्वजनिक सूचना अधिकारियों (PIO) द्वारा आवेदकों को जवाब देने में काफी देरी हो रही है।

आयोग के समक्ष जांच के दौरान, PIO ने RTI आवेदनों को ऑनलाइन संभालने में कठिनाई व्यक्त की। श्री अख्तर ने कहा, "इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि RTI अधिनियम में निर्धारित 30 दिनों की समय सीमा का सख्ती से पालन किया जा सके।" यह पत्र उन्होंने पिछले महीने सेवानिवृत्त होने से कुछ दिन पहले लिखा था।

प्रभाव और चुनौतियां

श्री अख्तर ने बताया कि सचिवालय विभागों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्ट्रेटों में अधिनियम की धारा 6(1) के तहत आवेदन और धारा 19(1) के तहत प्रथम अपील दाखिल करने की ऑनलाइन सुविधा अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं हो पाई है। इस वजह से कई आवेदकों ने आयोग में जांच के दौरान शिकायत की।

उन्होंने कहा, "अब समय आ गया है कि सभी सचिवालय विभागों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्ट्रेटों में धारा 6(1) के तहत आवेदन और धारा 19(1) के तहत प्रथम अपील ऑनलाइन दाखिल करने की व्यवस्था की जाए।"

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

श्री अख्तर ने कहा कि RTI अधिनियम पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था, ताकि लोकतांत्रिक आदर्शों को मजबूत किया जा सके। उन्होंने सुझाव दिया कि आयोग की आधिकारिक वेबसाइट का लिंक सभी हितधारकों की जानकारी के लिए वेबसाइट प्रबंधन को उपलब्ध कराया जा सकता है, ताकि कोई भी व्यक्ति मौजूदा प्रक्रिया के अलावा इस लिंक के माध्यम से आवेदन दाखिल कर सके।

अपने पूर्व पत्राचार में, श्री अख्तर ने राज्य सरकार का ध्यान अधिनियम की धारा 4(2) की ओर आकर्षित किया था, जो नियमित अंतराल पर इंटरनेट सहित विभिन्न माध्यमों से लोगों को सूचना उपलब्ध कराने पर जोर देती है, ताकि आवेदकों को जानकारी प्राप्त करने के लिए इस अधिनियम का न्यूनतम उपयोग करना पड़े।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

  • RTI आवेदनों के निपटान में देरी एक गंभीर मुद्दा है, जो सूचना के अधिकार को प्रभावित करता है।
  • तमिलनाडु सरकार को ऑनलाइन प्रबंधन प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।
  • आवेदक ऑनलाइन आवेदन की सुविधा मिलने पर समय और संसाधनों की बचत कर सकेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

RTI आवेदनों के निपटान की समय सीमा क्या है?

RTI अधिनियम, 2005 के तहत सार्वजनिक सूचना अधिकारियों (PIO) को आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर जवाब देना अनिवार्य है।

तमिलनाडु सूचना आयोग ने क्या सिफारिश की है?

आयोग ने सभी सचिवालय विभागों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्ट्रेटों में RTI आवेदनों और अपीलों के ऑनलाइन प्रबंधन की सिफारिश की है ताकि देरी को कम किया जा सके।

ऑनलाइन प्रक्रिया में क्या समस्या है?

वर्तमान में ऑनलाइन प्रक्रिया प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाई है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है और PIO को आवेदनों के निपटान में कठिनाई हो रही है।

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