प्रमुख तथ्य
सोलन जिले के दाड़लाघाट क्षेत्र में स्थित राजकीय उच्च विद्यालय कशलोग में बुधवार को आपदा प्रबंधन को लेकर एक विशेष अभ्यास आयोजित किया गया। फायर ब्रिगेड टीम ने विद्यार्थियों को आपदा के समय बचाव और सुरक्षित निकासी का प्रशिक्षण दिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए तैयार करना था।
ड्रिल का विवरण
फायर ऑफिसर अशोक कुमार के नेतृत्व में चार सदस्यीय फायर ब्रिगेड टीम ने यह प्रशिक्षण दिया। टीम ने विद्यार्थियों को आग लगने के विभिन्न कारणों, बचाव के उपायों और विभिन्न प्रकार के अग्निशामक यंत्रों के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। इसके अलावा, बिजली, गैस, रसोई और अन्य ज्वलनशील पदार्थों से लगने वाली आग की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया।
सीपीआर प्रशिक्षण
इस अवसर पर विद्यार्थियों को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया गया। फायर ब्रिगेड टीम ने बताया कि किसी दुर्घटना या आपातकालीन स्थिति में सीपीआर का सही और समय पर उपयोग किसी व्यक्ति का जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सुरक्षित निकासी का अभ्यास
मॉक ड्रिल के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों को आपदा के समय सुरक्षित एवं त्वरित निकासी की प्रक्रिया का अभ्यास करवाया गया। इस अभ्यास में सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और आपातकालीन स्थिति में उचित व्यवहार सीखा।
स्कूल प्रशासन की प्रतिक्रिया
विद्यालय के कार्यवाहक मुख्याध्यापक ललित कुमार गांधी ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इससे बच्चों में आपदा के समय सही निर्णय लेने, घबराहट से बचने तथा दूसरों की सहायता करने की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने फायर ब्रिगेड टीम का आभार व्यक्त किया।
विद्यार्थियों को क्या सीखने को मिला?
- आग लगने के कारण और बचाव के उपाय
- अग्निशामक यंत्रों का सही उपयोग
- सीपीआर तकनीक का प्रशिक्षण
- आपदा के समय सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह आपदा प्रबंधन अभ्यास कहां आयोजित किया गया?
यह अभ्यास सोलन जिले के दाड़लाघाट क्षेत्र के राजकीय उच्च विद्यालय कशलोग में आयोजित किया गया।
इस अभ्यास में किन-किन विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया?
विद्यार्थियों को आग लगने के कारण, बचाव के उपाय, अग्निशामक यंत्रों का उपयोग, सीपीआर तकनीक और आपदा के समय सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया।
इस प्रशिक्षण का नेतृत्व किसने किया?
प्रशिक्षण का नेतृत्व फायर ऑफिसर अशोक कुमार ने किया, जिनकी चार सदस्यीय टीम ने ड्रिल का संचालन किया।
स्कूल प्रशासन का इस प्रशिक्षण पर क्या कहना है?
कार्यवाहक मुख्याध्यापक ललित कुमार गांधी ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से विद्यार्थियों में आपदा के समय सही निर्णय लेने और दूसरों की सहायता करने की क्षमता विकसित होती है।