मुख्य तथ्य
कुल्लू जिले के दुर्गम क्षेत्र जाहलमा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में डॉ. अंकिता केवा ने कार्यभार संभाल लिया है। इस नियुक्ति से सात माह से चिकित्सक के अभाव में जूझ रहे हजारों ग्रामीणों को नियमित स्वास्थ्य सेवाएं मिलने लगेंगी।
विस्तार से
पीएचसी जाहलमा में 27 नवंबर 2025 से चिकित्सक का पद रिक्त था। इस दौरान पीएचसी फूड़ा में तैनात डॉ. सुनील पुजारा सप्ताह में तीन दिन यहां सेवाएं दे रहे थे, जिससे मरीजों को पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पाती थी। अब स्थायी चिकित्सक की तैनाती से मरीजों को राहत मिलेगी।
प्रभावित क्षेत्र
इस पीएचसी के अंतर्गत हालिंग, जाहलमा, यंगथंग, ओथंग, तिवोक, लोमच, तलजोन, जुंडा, गालिंग, खरुटी, तड़ंग, नालडा और जसरथ सहित तीन पंचायतों के 13 गांवों के ग्रामीण आते हैं। स्थायी चिकित्सक मिलने से इन गांवों के लोगों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
कार्यकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार गांधी ने बताया कि डॉ. अंकिता केवा ने 4 जुलाई 2026 को पीएचसी जाहलमा में ज्वाइन किया है। वहीं, क्षेत्रीय विधायक अनुराधा राणा ने डॉ. अंकिता को नियुक्ति पर बधाई दी है।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
यह नियुक्ति हिमाचल प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। स्थानीय निवासियों को अब नियमित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे उनके स्वास्थ्य स्तर में सुधार होने की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जाहलमा पीएचसी में डॉक्टर का पद कब से खाली था?
27 नवंबर 2025 से यह पद खाली था।
डॉ. अंकिता केवा ने कब कार्यभार संभाला?
उन्होंने 4 जुलाई 2026 को कार्यभार संभाला।
जाहलमा पीएचसी से कितने गांवों को लाभ मिलता है?
तीन पंचायतों के 13 गांवों को इस पीएचसी से स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं।