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केरल हाईकोर्ट ने सात दलित परिवारों की बेदखली पर रोक लगाई, सरकारी मध्यस्थता से समझौता

प्रमुख तथ्य केरल हाईकोर्ट ने सात दलित परिवारों की बेदखली पर रोक लगाते हुए एक लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद का समाधान कर दिया है। यह मामला एर्नाकुलम जिले के पेरुम्बावूर के…

प्रमुख तथ्य

केरल हाईकोर्ट ने सात दलित परिवारों की बेदखली पर रोक लगाते हुए एक लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद का समाधान कर दिया है। यह मामला एर्नाकुलम जिले के पेरुम्बावूर के पास पार्यथुकावु, मलयिदामथुरुथ में स्थित है। अदालत ने राज्य सरकार की मध्यस्थता में हुए समझौते को मंजूरी दे दी, जिसके तहत प्रत्येक परिवार को पांच सेंट जमीन दी जाएगी।

विवरण

न्यायमूर्ति टी.आर. रवि की एकल पीठ ने मुन्सिफ कोर्ट, पेरुम्बावूर को निर्देश दिया कि वह बेदखली के आदेश के निष्पादन पर एक वर्ष के लिए रोक लगाए। इस दौरान परिवारों को सरकार द्वारा आवंटित भूमि पर निर्मित नए घरों में स्थानांतरित होना होगा। समझौते के अनुसार, परिवार अपने मौजूदा घरों में तब तक रह सकते हैं जब तक नए मकान तैयार नहीं हो जाते। आवंटित भूमि के साथ तीन मीटर चौड़ी सड़क भी शामिल होगी, और परिवारों के भूखंडों को जमींदार की संपत्ति से दीवार द्वारा अलग किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

पार्यथुकावु की यह जमीन दशकों से विवादित थी। परिवार कम से कम तीन पीढ़ियों से वहां रह रहे थे। मुन्सिफ कोर्ट ने पहले भी कई बार बेदखली के आदेश जारी किए थे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट सहित विभिन्न अदालतों ने बरकरार रखा था। सितंबर 2023 से अब तक 15 बार एडवोकेट कमिश्नर द्वारा बेदखली के प्रयासों का विरोध हुआ। मई 2026 में नवीनतम बेदखली प्रयास के दौरान बड़ी पुलिस टुकड़ी के साथ पहुंचे कमिश्नर के खिलाफ पार्यथुकावु एक्शन काउंसिल और CPI(M) नेताओं के समर्थन से विरोध प्रदर्शन तेज हो गया था।

सरकार की भूमिका

यूडीएफ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने जून में पदभार संभालने के बाद हाईकोर्ट में कार्यवाही में शामिल होकर विवाद को सुलझाने में मदद की। अदालत ने समझौते को रिकॉर्ड करते हुए मुन्सिफ कोर्ट को निर्देश दिया कि वह बेदखली के आदेश को एक वर्ष के लिए स्थगित रखे।

प्रभाव और आगे की राह

इस समझौते से न केवल सात दलित परिवारों को राहत मिली है, बल्कि यह भूमि विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान का एक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। सरकार द्वारा जमीन और आवास उपलब्ध कराने से परिवारों को स्थायी निवास मिलेगा। यह फैसला समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा में न्यायपालिका और सरकार की सकारात्मक भूमिका को दर्शाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • केरल हाईकोर्ट ने किस मामले में फैसला सुनाया? हाईकोर्ट ने सात दलित परिवारों की बेदखली के मामले में समझौते के बाद याचिका का निपटारा किया।
  • समझौते के तहत परिवारों को क्या मिलेगा? प्रत्येक परिवार को पांच सेंट जमीन और नया मकान बनने तक पुराने घर में रहने की अनुमति मिलेगी।
  • यह विवाद कितना पुराना है? यह विवाद दशकों पुराना है और परिवार कम से कम तीन पीढ़ियों से वहां रह रहे थे।
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