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जनगणना 2027 के पूर्वाभ्यास में जाति के लिए खुला कॉलम, 16 राज्यों में शुरू हुआ परीक्षण

पूर्वाभ्यास में जाति के लिए खुला कॉलम जनगणना 2027 के दूसरे चरण के पूर्वाभ्यास में जाति दर्ज करने के लिए एक खुला कॉलम रखा गया है। यह अभ्यास 6 जुलाई 2026 से 16 राज्यों और…

पूर्वाभ्यास में जाति के लिए खुला कॉलम

जनगणना 2027 के दूसरे चरण के पूर्वाभ्यास में जाति दर्ज करने के लिए एक खुला कॉलम रखा गया है। यह अभ्यास 6 जुलाई 2026 से 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शुरू हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, यह सिर्फ एक प्री-टेस्ट है और अंतिम पद्धति इसी के फीडबैक के आधार पर तैयार की जाएगी।

क्या है खुला कॉलम?

इस पूर्वाभ्यास में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों के लिए कोड दिए जाएंगे, जबकि अन्य लोगों के लिए एक खुला कॉलम होगा जिसमें वे अपनी जाति बता सकते हैं। एक अधिकारी ने कहा, 'एससी और एसटी समुदायों को हमेशा की तरह कोड से गिना जाएगा, बाकी लोगों के लिए खुला कॉलम होगा और गणनाकर्ता वही दर्ज करेंगे जो निवासी बताएगा।'

पूर्वाभ्यास का दायरा और समय

यह पूर्वाभ्यास 6 जुलाई से 20 जुलाई 2026 तक चलेगा। फरीदाबाद, हरियाणा के वार्ड नंबर 24 में 17 गणना खंडों में यह परीक्षण किया जा रहा है। प्रत्येक खंड में लगभग 150-180 आवासीय इकाइयाँ हैं जिनमें 650-800 लोग रहते हैं। इस दौरान स्व-गणना की सुविधा भी दी गई है, जो 1 से 5 जुलाई तक केवल उसी क्षेत्र में उपलब्ध थी।

जनगणना 2027 की मुख्य विशेषताएँ

  • यह पहली डिजिटल जनगणना होगी और स्वतंत्र भारत में पहली बार जाति की गणना की जाएगी।
  • जनसंख्या गणना (पीई) चरण फरवरी 2027 में देशभर में होगा, लेकिन लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश के बर्फीले क्षेत्रों में यह 30 सितंबर 2026 तक पूरा होगा।
  • अंतिम प्रश्नावली सितंबर 2026 तक जारी होगी।

पहले चरण की स्थिति

जनगणना का पहला चरण - आवास सूचीकरण और गृह सूची (HLO) - अभी आठ राज्यों में पूरा नहीं हुआ है। इनमें हिमाचल प्रदेश, केरल, नागालैंड, तमिलनाडु, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, असम और मणिपुर शामिल हैं।

जाति गणना का इतिहास और चुनौतियाँ

2011 की सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना (SECC) में भी खुला कॉलम रखा गया था, जिसके परिणामस्वरूप 46 लाख से अधिक विभिन्न 'जाति नाम' दर्ज हुए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले दशक में कहा था कि 2011 SECC का जाति डेटा 'डेटा संग्रह में त्रुटियों' के कारण अविश्वसनीय था। 1931 की जनगणना में कुल 4,147 जातियाँ दर्ज की गई थीं।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के सामने यह चुनौती है कि वह जाति गणना की पद्धति को अंतिम रूप दे। पूर्वाभ्यास के नतीजों के आधार पर ही तय होगा कि अंतिम गणना में खुला कॉलम रहेगा या जातियों की सूची दी जाएगी।

FAQ

जनगणना 2027 में जाति कैसे दर्ज की जाएगी?

पूर्वाभ्यास में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए कोड होंगे, जबकि अन्य लोगों के लिए खुला कॉलम होगा जिसमें वे अपनी जाति बता सकते हैं।

पूर्वाभ्यास कब और कहाँ हो रहा है?

यह 6 जुलाई से 20 जुलाई 2026 तक 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहा है। फरीदाबाद के वार्ड नंबर 24 में 17 गणना खंडों में परीक्षण किया जा रहा है।

क्या हिमाचल प्रदेश में भी पूर्वाभ्यास हो रहा है?

हाँ, हिमाचल प्रदेश उन 16 राज्यों में शामिल है जहाँ पूर्वाभ्यास चल रहा है। हालांकि, बर्फीले क्षेत्रों में जनगणना का मुख्य चरण सितंबर 2026 तक पूरा होगा।

पहले चरण की गणना किन राज्यों में अधूरी है?

हिमाचल प्रदेश, केरल, नागालैंड, तमिलनाडु, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, असम और मणिपुर में आवास सूचीकरण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है।

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