मुख्य बिंदु
कोच्चि स्थित सेंटर फॉर माइग्रेशन एंड इन्क्लूसिव डेवलपमेंट (CMID) ने केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के प्रवासी मजदूरों पर दिए गए बयान पर नाराजगी जताई है। CMID ने स्पष्ट किया कि प्रवासी मजदूरों द्वारा घर भेजा गया पैसा रेमिटेंस है, न कि रिवर्स रेमिटेंस।
विवरण
CMID के कार्यकारी निदेशक बेनॉय पीटर ने एक बयान में कहा कि प्रवासी मजदूरों का ₹52,000 करोड़ का रेमिटेंस मलयाली प्रवासियों के ₹2.16 लाख करोड़ के रेमिटेंस की तुलना में देखा जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री की उस टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रवासी मजदूरों को केवल गेहूं का आटा, प्याज और शराब चाहिए।
प्रवासी मजदूरों का खर्च
बेनॉय पीटर ने बताया कि प्रवासी मजदूर अपनी कमाई का लगभग एक-तिहाई केरल में ही खर्च करते हैं, जिसमें किराया, लॉटरी, मोबाइल रिचार्ज, मोबाइल फोन खरीद, भोजन, कपड़े, रेमिटेंस शुल्क, दवाइयां, ऑटोरिक्शा किराया और सैलून शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केरल के लोग ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के लिए सैकड़ों बसें चलाते हैं।
प्रभाव
CMID ने चेतावनी दी कि मुख्यमंत्री के इस तरह के बयान से प्रवासी मजदूरों के प्रति नकारात्मक धारणा बन सकती है। उन्होंने कहा कि केरल अभी भी एक 'मनी ऑर्डर इकोनॉमी' है और मलयालियों के प्रवास के इतिहास को नहीं भूलना चाहिए।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
यह मुद्दा केरल की अर्थव्यवस्था में प्रवासी मजदूरों के योगदान को उजागर करता है। प्रवासी मजदूर न केवल रेमिटेंस भेजते हैं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी योगदान देते हैं।
FAQ
प्रवासी मजदूरों का रेमिटेंस कितना है?
केरल में प्रवासी मजदूरों का वार्षिक रेमिटेंस लगभग ₹52,000 करोड़ है।
CMID ने CM के बयान पर क्या कहा?
CMID ने कहा कि CM का बयान भ्रामक है और प्रवासी मजदूरों का रेमिटेंस उनका अधिकार है।
प्रवासी मजदूर केरल में कितना खर्च करते हैं?
वे अपनी कमाई का लगभग एक-तिहाई केरल में ही खर्च करते हैं।