मुख्य तथ्य
मणिपुर के उखरुल जिले में सोमवार (6 जुलाई 2026) को असम राइफल्स के एक गश्ती दल पर हमला हुआ, जिसमें दो जवान शहीद हो गए। यह घटना दोपहर करीब 1:30 बजे नुंगशांगखोंग गांव के पास हुई, जो उखरुल शहर से लगभग 16 किलोमीटर पूर्व में है। गोलीबारी शाम 4:30 बजे तक रुक-रुक कर जारी रही।
विस्तार से जानकारी
हमले में शहीद जवानों की पहचान वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह और हवलदार चंद्र मोहन सिंह के रूप में हुई है। ये दोनों संगशक में तैनात 40 असम राइफल्स डिटैचमेंट के सदस्य थे। असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
सरकार की प्रतिक्रिया
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने हमले की निंदा की और शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'सरकार इस तरह की क्रूर हिंसा बर्दाश्त नहीं करेगी और इन अत्याचारों पर चुप नहीं बैठेगी।' उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों को गिरफ्तार कर सजा दी जाएगी।
NSCN का बयान
कुछ रिपोर्टों में हमले के लिए नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम (NSCN) के पूर्वी विंग को जिम्मेदार ठहराया गया। NSCN, जिसे नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (इसाक-मुइवा) के नाम से भी जाना जाता है, जुलाई 1997 से भारत सरकार के साथ संघर्ष विराम में है। NSCN के 'सूचना मंत्रालय' ने एक बयान में ऐसे किसी गुट के अस्तित्व को खारिज करते हुए कहा कि संगठन 'न तो इस हमले में शामिल था और न ही उसे इसकी कोई जानकारी है।' बयान में कहा गया, 'संगठन भारत सरकार के साथ संघर्ष विराम समझौते के प्रति दृढ़ता से प्रतिबद्ध है और सहमत मैदानी नियमों के तहत अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करता रहेगा।' NSCN ने आगे कहा कि वह कभी भी ऐसी कार्रवाई नहीं करेगा जो चल रही 'भारत-नागा' राजनीतिक वार्ता को कमजोर, पटरी से उतार या तोड़फोड़ कर सके।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
यह घटना मणिपुर में सुरक्षा चुनौतियों को उजागर करती है। सरकार और सुरक्षा बल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। NSCN के इनकार के बावजूद, जांच जारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- हमला कहां हुआ? मणिपुर के उखरुल जिले के नुंगशांगखोंग गांव के पास हुआ।
- हमले में कितने जवान शहीद हुए? दो जवान शहीद हुए।
- NSCN का हमले में क्या रुख है? NSCN ने हमले से इनकार किया और कहा कि वह संघर्ष विराम का पालन कर रहा है।