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केरल उच्च न्यायालय ने मानसिक बीमारी के कारण बरी किए गए व्यक्तियों के पुनर्वास का आदेश दिया

मुख्य तथ्य केरल उच्च न्यायालय ने मानसिक बीमारी के कारण बरी किए गए व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायालय ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को निर्देश दिया कि…

मुख्य तथ्य

केरल उच्च न्यायालय ने मानसिक बीमारी के कारण बरी किए गए व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायालय ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को निर्देश दिया कि वह मेंटल हेल्थ केयर एक्ट, 2017 के तहत ऐसे व्यक्तियों के पुनर्वास सुविधाओं का व्यापक मूल्यांकन करे। यह आदेश पुल्लेपाडी के एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसे पड़ोस के 10 वर्षीय बालक की हत्या के मामले में मानसिक अस्वस्थता के कारण बरी कर दिया गया था।

विस्तृत जानकारी

न्यायालय में यह बताया गया कि यदि व्यक्ति चिकित्सकीय रूप से समाज में पुनः शामिल होने योग्य पाया जाता है, तब भी उसके पुनर्वास के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस संदर्भ में, सामाजिक न्याय विभाग ने केरल में मानसिक बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए मौजूदा पुनर्वास सुविधाओं पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की।

राज्य ने बताया कि विचाराधीन कैदियों और मानसिक अस्वस्थता के कारण बरी किए गए व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए एक योजना है। इस योजना का उद्देश्य उन्हें मानसिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं से अनुमोदित मनोसामाजिक पुनर्वास केंद्रों में स्थानांतरित करना है, जो तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम और वायनाड में चार गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि तिरुवनंतपुरम और त्रिशूर के सरकारी मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों में 97 ऐसे व्यक्ति हैं जो पुनर्वास के लिए उपयुक्त हैं, और विभाग उनके पुनर्वास और निरंतर देखभाल के लिए एक समय-सीमा तय करने के लिए कदम उठा रहा है।

प्रभाव और आगे की कार्रवाई

न्यायालय ने राज्य को मेंटल हेल्थ केयर एक्ट के तहत राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण और हाफवे होम स्थापित करने का निर्देश दिया। हाफवे होम संक्रमणकालीन आवासीय सुविधाएं हैं जो मानसिक बीमारी से उबर चुके व्यक्तियों को स्वतंत्र जीवन के लिए तैयार करती हैं।

विभाग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि छह आशाभवन केंद्रों में लगभग 380 व्यक्ति रह रहे हैं, जो प्रत्येक केंद्र की 50 की क्षमता से अधिक है। ये केंद्र उन लोगों को पुनर्वास सेवाएं प्रदान करते हैं जो ठीक हो चुके हैं लेकिन मनोसामाजिक सहायता की आवश्यकता है।

न्यायालय ने राज्य को 120 पंजीकृत मनोसामाजिक पुनर्वास केंद्रों का मूल्यांकन करने का निर्देश दिया ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि वे अपने निवासियों को सुरक्षित और पुनर्वासकारी वातावरण प्रदान करने में सक्षम हैं। इन संस्थानों से आशाभवन केंद्रों पर बोझ काफी कम हो सकता है और व्यक्तियों को पर्याप्त सहायता सुनिश्चित हो सकती है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

  • मेंटल हेल्थ केयर एक्ट, 2017 मानसिक बीमारी के कारण बरी किए गए व्यक्तियों के पुनर्वास का प्रावधान करता है।
  • राज्य को हाफवे होम और राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण स्थापित करना आवश्यक है।
  • आशाभवन केंद्रों की क्षमता से अधिक भीड़ है, जिसे पंजीकृत पुनर्वास केंद्रों के मूल्यांकन के बाद कम किया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल उच्च न्यायालय ने क्या आदेश दिया है?

न्यायालय ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को मानसिक बीमारी के कारण बरी किए गए व्यक्तियों के पुनर्वास सुविधाओं का व्यापक मूल्यांकन करने का आदेश दिया है।

राज्य में कितने व्यक्ति पुनर्वास के लिए उपयुक्त हैं?

सरकारी मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों में 97 ऐसे व्यक्ति हैं जो पुनर्वास के लिए उपयुक्त हैं।

हाफवे होम क्या होते हैं?

हाफवे होम संक्रमणकालीन आवासीय सुविधाएं हैं जो मानसिक बीमारी से उबर चुके व्यक्तियों को स्वतंत्र जीवन के लिए तैयार करती हैं।

आशाभवन केंद्रों की वर्तमान स्थिति क्या है?

छह आशाभवन केंद्रों में लगभग 380 व्यक्ति रह रहे हैं, जो प्रत्येक केंद्र की 50 की क्षमता से अधिक है।

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