मुख्य तथ्य
22 जून 2001 को केरल के कडलुंडी में हुए रेल हादसे को 25 साल पूरे हो गए। इस हादसे में 52 लोगों की जान गई और लगभग 300 लोग घायल हुए। मंगलुरु-चेन्नई मेल ट्रेन कडलुंडी स्टेशन पार करने के बाद पुल से नीचे गिर गई थी।
हादसे का विवरण
22 जून 2001 को शाम करीब 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मंगलुरु-चेन्नई मेल ट्रेन कडलुंडी पुल पर चढ़ी ही थी कि पुल के दक्षिणी छोर पर गर्डर टूट गया। ट्रेन के छह डिब्बे नीचे नदी में जा गिरे। चीख-पुकार मच गई और ग्रामीण तुरंत बचाव कार्य में जुट गए।
बचाव अभियान
पास में काम कर रहे रेत खनिकों और चालियम के मछुआरों ने तुरंत नावें लॉन्च कीं और बचाव शुरू किया। बाद में बेयपोर के खलासी, दमकलकर्मी और पुलिस भी शामिल हुए। रात भर चले बचाव अभियान में क्राउबार और गैस कटर से डिब्बों को काटकर फंसे यात्रियों को निकाला गया।
प्रभाव और यादें
इस हादसे ने पूरे केरल को झकझोर दिया। कोझिकोड और मलप्पुरम के अस्पतालों में परिजन अपनों की तलाश में भटकते रहे। कई शवों की पहचान नहीं हो सकी। एक अधजले डिब्बे की खिड़की से बाहर निकला हाथ आज भी ग्रामीणों की यादों में ताजा है।
आज की स्थिति
25 साल बाद भी हादसे के कारणों का पता नहीं चल सका। रेलवे अधिकारी पुल के टूटने का कोई ठोस कारण नहीं बता पाए। लेकिन कडलुंडी के लिए यह हादसा सिर्फ एक अतीत की घटना नहीं, बल्कि एक जीवित याद है जो गांव को एकजुट रखती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कडलुंडी रेल हादसा कब हुआ था?
यह हादसा 22 जून 2001 को हुआ था।
कडलुंडी रेल हादसे में कितने लोग मारे गए?
इस हादसे में 52 लोगों की मौत हुई और लगभग 300 लोग घायल हुए।
कडलुंडी रेल हादसे का कारण क्या था?
रेलवे अधिकारियों ने पुल के टूटने का कारण निश्चित रूप से स्थापित नहीं किया है। कई सिद्धांत सामने आए हैं लेकिन कोई भी पूरी तरह से रहस्य को सुलझा नहीं पाया।