Desh Duniya | छत गिरना

महाराष्ट्र के परभणी में मंदिर की छत गिरी, 7 की मौत, 25 घायल

मुख्य तथ्य महाराष्ट्र के परभणी जिले में शनिवार (20 जून 2026) को एक मंदिर की निर्माणाधीन छत गिरने से 7 लोगों की मौत हो गई और 25 अन्य घायल हो गए। यह घटना मानवत तालुक…

मुख्य तथ्य

महाराष्ट्र के परभणी जिले में शनिवार (20 जून 2026) को एक मंदिर की निर्माणाधीन छत गिरने से 7 लोगों की मौत हो गई और 25 अन्य घायल हो गए। यह घटना मानवत तालुक के यशवाड़ी गांव में हनुमान मंदिर में दोपहर के समय हुई, जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु साप्ताहिक प्रार्थना और सामूहिक भोजन के लिए एकत्र हुए थे।

हादसे का विवरण

जिला कलेक्टर संजय चव्हाण, उप-विभागीय अधिकारी संगीता चव्हाण और तहसीलदार पांडुरंग मचेवाड ने बताया कि मलबे से 32 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें से 7 को मृत घोषित किया गया। बाकी 25 घायलों का इलाज चल रहा है। बचाव कार्य ढाई घंटे तक चला, जिसमें पुलिस, आपदा प्रबंधन टीम, लोक निर्माण विभाग और स्थानीय ग्रामीण शामिल थे।

प्रभाव और राहत कार्य

शनिवार को मंदिर में परभणी और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। गिरी हुई संरचना मुख्य मंदिर के सामने एक हॉल थी, जहां धार्मिक गतिविधियां चल रही थीं। घटना से मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंचे। पथरी और नगर निगम से फायर ब्रिगेड की टीमों ने मलबे में दबे लोगों को निकाला। कई एम्बुलेंस घायलों को अस्पताल ले गईं।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

परभणी सांसद संजय जाधव ने घटना पर दुख व्यक्त किया और प्रशासन से घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने का आग्रह किया। परभणी विधायक डॉ. राहुल पाटिल ने मृतकों के परिवारों को शोक संवेदना दी और प्रशासन को राहत कार्यों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।

जांच जारी

छत गिरने के कारणों की जांच की जा रही है। प्रशासन का ध्यान फिलहाल बचाव और चिकित्सा पर है। मंदिर और अस्पतालों में परिजन अपने लोगों की जानकारी जुटा रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यह हादसा कहां हुआ?

महाराष्ट्र के परभणी जिले के मानवत तालुक के यशवाड़ी गांव में हनुमान मंदिर में हुआ।

हादसे में कितने लोग मारे गए?

इस हादसे में 7 लोगों की मौत हुई और 25 लोग घायल हुए।

छत क्यों गिरी?

कारणों की जांच की जा रही है। मंदिर का हॉल निर्माणाधीन था।

राहत कार्य में कौन शामिल था?

पुलिस, आपदा प्रबंधन टीम, लोक निर्माण विभाग और स्थानीय ग्रामीण शामिल थे।

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